

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच राज्य के राशन डीलरों ने राजनीतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राशन डीलरों के संगठन ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन ने साफ किया कि उनकी मांगों को नजरअंदाज करना राजनीतिक दलों को भारी पड़ सकता है।
राशन डीलरों का कहना है कि वे केंद्र और राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं को जनता तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने अपने चुनावी घोषणापत्र में उनके भविष्य या सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के सुधार को लेकर कोई ठोस वादा नहीं किया है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव बिस्वंभर बसु ने कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी बड़ी कल्याणकारी योजना से जुड़े लोगों की समस्याओं पर सभी दल मौन हैं।"
राशन डीलरों ने स्पष्ट किया है कि वे लंबे समय से निम्नलिखित मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं:
कमीशन में बढ़ोतरी: चावल और गेहूं पर वर्तमान में मिल रहे लगभग 95 रुपये के बजाय 250 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन की मांग।
बकाये का भुगतान: e-PoS और डिजिटल वजन मशीनों के माध्यम से वितरण के लिए NFSA नियमों के तहत 21 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त कमीशन।
नई व्यवस्थाओं का विरोध: राशन व्यवस्था को कथित तौर पर कमजोर करने वाली DBT (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) और 'ग्रेन एटीएम' जैसी योजनाओं को लागू न करने की अपील।
संगठन ने बताया कि उन्होंने 17 अप्रैल को तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों के प्रदेश नेतृत्व को अपना मांग पत्र भेजा था, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। इसके विरोध में राशन डीलरों ने निर्णय लिया है कि वे, उनके कर्मचारी और उनके परिवार इस चुनाव में 'वोट बहिष्कार' करेंगे।