पश्चिमी घाट में खोजी गई दुर्लभ और बिना पैरों वाली प्रजाति

पश्चिमी घाट में खोजी गई दुर्लभ और बिना पैरों वाली प्रजाति
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : भारतीय वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र के उत्तरी पश्चिमी घाट में जमीन के नीचे रहने वाले दुर्लभ और बिना पैरों वाले उभयचर (एम्फिबियन) की एक नई प्रजाति की खोज की है। इस अनोखे जीव का नाम 'गेजेनियोफिस चांदगड़ी' (Gegeneophis chandgadi) रखा गया है, जो 'सिकलियन' (caecilian) परिवार से ताल्लुक रखता है। यह जीव जमीन के अंदर भूमिगत जीवन बिताता है और देखने में केंचुए या छोटे सांप जैसा प्रतीत होता है। इस शानदार खोज ने देश की जैव विविधता के दायरे को और अधिक विस्तृत कर दिया है।

स्थान और नामकरण की अनूठी कहानी

इस नई प्रजाति के नमूने अगस्त 2025 के दौरान कोल्हापुर जिले के चांदगढ़ तालुका स्थित बुजावाड़े गांव के पास खोजे गए थे। इस जीव की पहचान का औपचारिक विवरण 'जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया' के रिकॉर्ड में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने इस दुर्लभ जीव का नाम स्थानीय मराठी बोली 'चांदगड़ी' के सम्मान में रखा है, जो इस क्षेत्र की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को एक अनूठी श्रद्धांजलि देता है। इस खोज में स्थानीय लोगों के पारंपरिक ज्ञान ने भी वैज्ञानिकों की काफी मदद की।

मानव बस्तियों के पास मिला दुर्लभ जीव

इस खोज की सबसे बड़ी विशेषता इसका आवास स्थल है। यह जीव किसी घने या संरक्षित जंगल के अंदर नहीं, बल्कि इंसानी बस्तियों, खेतों और मानवीय गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों के आसपास पाया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह इस बात का प्रमाण है कि कई अनमोल प्रजातियां औपचारिक रूप से संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी जमीन के नीचे जीवित रह सकती हैं।

इस प्रजाति को अलग श्रेणी में स्थापित करने के लिए वैज्ञानिकों ने इसके शारीरिक लक्षणों की बारीकी से जांच करने के साथ-साथ माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का विश्लेषण भी किया। इस खोज के बाद भारत में अब सिकलियन की कुल मान्यता प्राप्त प्रजातियों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है, जबकि 'गेजेनियोफिस' जीनस के अंतर्गत ज्ञात प्रजातियों की संख्या अब 12 तक पहुंच गई है।

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