पुरी के जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में रत्न सिंहासन की फोटो वायरल, प्रशासन सकते में

ओडिशा पुलिस ने बुधवार को श्री जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में रत्न सिंहासन की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला दर्ज किया।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में रत्न सिंहासन की फोटो वायरल, प्रशासन सकते में
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पुरीः ओडिशा पुलिस ने बुधवार को श्री जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में रत्न सिंहासन की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला दर्ज किया। रत्न सिंहासन की तस्वीर के वायरल होने से 12वीं शताब्दी के इस मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

पुरी के पुलिस अधिक्षक प्रतीक सिंह ने बताया, “हमने श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम की धाराओं के तहत सिंह द्वार थाने में मामला दर्ज किया है। हमारी साइबर टीम उन सोशल मीडिया मंचों पर नजर रख रही है, जहां रत्न सिंहासन की तस्वीरें पोस्ट की गई हैं।” मंदिर के अंदर कैमरे व मोबाइल फोन प्रतिबंधित हैं।

फोटोग्राफी रोकने के लिए कड़े कानून की मांग

पुलिस ने बताया कि रत्न सिंहासन पर विराजमान भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ की तस्वीर बहुत करीब से ली गई थी। सिंह ने बताया, “तस्वीर पोस्ट और उसे साझा करने वाले अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिलने के बाद ही हम अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।”

वरिष्ठ सेवक विनायक दासमहापात्रा ने अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए हमें कड़े कानून की आवश्यकता है। श्रीमंदिर में फोटोग्राफी प्रतिबंध का उल्लंघन एक आम बात हो गई है।”

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आतंकी खतरा की वजह से फोटोग्राफी प्रतिबंधित

जगन्नाथ संस्कृति शोधकर्ता भास्कर मिश्रा ने कहा कि मंदिर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लगाया गया था क्योंकि पुलिस का कहना है कि मंदिर को संभावित आतंकी खतरा है। उन्होंने कहा, “पुलिस को यह पता लगाना होगा कि कोई व्यक्ति मंदिर के अंदर कैमरा या मोबाइल फोन कैसे ले गया और तस्वीरें कैसे खींचीं।” इस घटना से मंदिर के सेवकों, श्रद्धालुओं और जनता में आक्रोश फैल गया तथा वे जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय निवासी रथिंद्र मिश्रा ने कहा, “तस्वीर खींचने वाला व्यक्ति अकेला दोषी नहीं है, बल्कि वे लोग भी जिम्मेदार होने चाहिए जो उसे मंदिर में कैमरा या स्मार्टफोन ले जाने से रोकने में नाकाम रहे।”

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