चुनाव आयोग ने नहीं किया 'विशेष शक्ति' का प्रयोग: सोनागाछी की 150 यौनकर्मी मताधिकार से वंचित

150 Sex Workers in Sonagachi Lose Voting Rights, Allegations Against Election Commission
फाइल फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता के प्रसिद्ध क्षेत्र सोनागाछी की लगभग 150 यौनकर्मियों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। यह घटना तब और भी गंभीर हो जाती है जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने खुद इन महिलाओं को विशेष शिविर लगाकर आश्वासन दिया था कि उन्हें वोट देने से कोई नहीं रोक पाएगा।

आश्वासन के बावजूद छीना गया अधिकार

कुछ समय पहले चुनाव आयोग ने सोनागाछी में एक विशेष शिविर का आयोजन किया था। वहां मनोज अग्रवाल ने वादा किया था, "यदि किसी के पास माता-पिता के नाम का विवरण नहीं भी है, लेकिन वह वैध नागरिक है, तो आयोग अपनी 'विशेष शक्तियों' (Special Powers) का उपयोग कर उनका नाम मतदाता सूची में शामिल करेगा।" लेकिन, जब अंतिम सूची सामने आई, तो लगभग 150 महिलाओं के नाम गायब थे। दुर्बार महिला समन्वय समिति की सचिव विशाखा लश्कर के अनुसार, कई महिलाओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया था और दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनका नाम शामिल नहीं किया गया।

पहचान और भविष्य को लेकर बढ़ा डर

यौनकर्मियों के बीच अब इस बात का डर है कि बिना पहचान पत्र और मताधिकार के उनका भविष्य असुरक्षित हो जाएगा। विशाखा लश्कर ने बताया कि कई महिलाओं के बच्चों के नाम तो सूची में हैं, लेकिन मां का नाम गायब है। सिर्फ सोनागाछी ही नहीं, बल्कि कालीघाट और खिदिरपुर जैसे इलाकों से भी इसी तरह की खबरें आ रही हैं। 'आमरा पदातिक' संगठन की महाश्वेता मुखर्जी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अब डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के माध्यम से भविष्य में दोबारा अधिकार पाने की कोशिश की जा रही है।

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