सोनम रघुवंशी की मुश्किलें बढ़ीं, 14 जुलाई को होगी विस्तृत सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट का लिखित दलीलें पेश करने का निर्देश

सोनम रघुवंशी की मुश्किलें बढ़ीं, 14 जुलाई को होगी विस्तृत सुनवाई
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शिलांग-नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर 14 जुलाई 2026 को विस्तृत सुनवाई करने का फैसला किया है। अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इस पर विस्तार से विचार किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसे बड़ी पीठ के पास भेजने पर भी विचार किया जा सकता है। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने पक्षकारों को अगली सुनवाई से पहले अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और अदालत सभी कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर मामले को बड़ी पीठ के समक्ष भेजा जा सकता है।

मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर मेघालय हाई कोर्ट के 29 जून 2026 के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत को बरकरार रखा गया था। राज्य सरकार का कहना है कि तकनीकी आधार पर दी गई जमानत कानून की मंशा के अनुरूप नहीं है।

टाइपिंग की गलती बनी जमानत का आधार

सोनम रघुवंशी को ट्रायल कोर्ट ने इसलिए जमानत दी थी क्योंकि गिरफ्तारी से जुड़े सात दस्तावेजों में से एक में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 की जगह गलती से धारा 403 दर्ज हो गई थी। राज्य सरकार का तर्क है कि यह केवल टाइपिंग की त्रुटि थी। बाकी छह दस्तावेजों में हत्या से संबंधित सही धारा दर्ज थी और उन सभी पर स्वयं सोनम के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। इसके अलावा, उसने अपनी पहली तीन जमानत याचिकाओं में इस मुद्दे का कभी उल्लेख नहीं किया था।

सॉलिसिटर जनरल ने जमानत का किया कड़ा विरोध

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट रूप से आरोपी को बताए गए थे और धारा 403 का उल्लेख केवल टाइपिंग की गलती थी। उन्होंने अदालत के सामने दावा किया कि यह पूर्व नियोजित हत्या का मामला है। उनके अनुसार, सोनम अपने पति राजा रघुवंशी को हनीमून के बहाने मेघालय ले गई, जहां पहले से रची गई साजिश के तहत तीन अन्य आरोपियों के साथ मिलकर उनकी हत्या कर दी गई। मेहता ने यह भी कहा कि पूरक आरोपपत्र के अनुसार, यदि मृतक को खाई में धक्का देने की योजना विफल हो जाती तो आरोपी के पास वैकल्पिक योजना (प्लान-बी) के तहत एक हथियार भी मौजूद था।

पहले तीन बार खारिज हो चुकी थी जमानत

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि सोनम ने एक वर्ष से भी कम समय में चार बार जमानत की अर्जी दाखिल की। पहली तीन याचिकाएं अदालतों ने यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत साक्ष्य हैं, उसके फरार होने की आशंका है और वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है। चौथी याचिका में पहली बार गिरफ्तारी की धारा में कथित त्रुटि का मुद्दा उठाया गया, जिसके आधार पर उसे जमानत मिल गई।

हत्या की पूरी साजिश पहले से रची गई थी: जांच एजेंसियां

जांच एजेंसियों के अनुसार, राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी मई 2025 में हनीमून के लिए मेघालय गए थे। 2 जून 2025 को सोहरा के पास एक गहरी खाई से राजा का शव बरामद हुआ था। जांच में आरोप है कि हत्या की साजिश इंदौर से रवाना होने से पहले ही रच ली गई थी। सोनम के कथित साथी राज कुशवाहा सहित अन्य आरोपियों ने वेई सॉडोंग क्षेत्र में ट्रेकिंग के दौरान राजा पर धारदार हथियारों से हमला किया और शव को खाई में फेंक दिया।

फोरेंसिक और सीसीटीवी साक्ष्यों का भी हवाला

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और जब्त किए गए डिजिटल व अन्य साक्ष्य सोनम तथा सह-आरोपियों की घटनास्थल के आसपास मौजूदगी की पुष्टि करते हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि अन्य आरोपियों की आवाजाही भी उसी मार्ग पर दर्ज हुई है, जिससे अभियोजन पक्ष के दावों को मजबूती मिलती है।

मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को

सुप्रीम कोर्ट अब 14 जुलाई 2026 को इस मामले की विस्तृत सुनवाई करेगा। इस दौरान अदालत यह तय करेगी कि तकनीकी त्रुटि के आधार पर दी गई जमानत कानूनी रूप से उचित थी या नहीं तथा क्या इस मामले में किसी बड़े संवैधानिक प्रश्न पर विचार की आवश्यकता है।

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