

गुवाहाटी : विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पार से होने वाले अपराधों में वृद्धि और कट्टरपंथी समूहों की गतिविधियों तथा पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने वाले गलियारे पर बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार द्वारा ‘‘दबाव’’ बनाने के कथित प्रयासों की आशंकाओं के बीच, असम में नया सैन्य अड्डा विशेष महत्व रखता है।
बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने में बड़ा कदम
उन्होंने कहा कि इस तरह का अड्डा स्थापित होने से सीमा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और संबंधित अधिकारियों को खुफिया क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 40 किलोमीटर दूर, असम के धुबरी जिले के बामुनिगांव में भारतीय सेना द्वारा लाचित बोरफुकन सैन्य अड्डा स्थापित किया जा रहा है, जो राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में पहला सैन्य अड्डा है।
जनरल आर सी तिवारी ने आधारशिला रखी
पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल आर सी तिवारी ने पिछले हफ्ते अग्रिम इलाकों के दौरे पर इस अड्डे की आधारशिला रखी। ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) रंजीत कुमार बोरठाकुर ने बताया, ‘बांग्लादेश में मौजूदा हालात को देखते हुए सैन्य अड्डा स्थापित करने का फैसला स्वागत योग्य है।’
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इससे पहले, सबसे नज़दीकी सैन्य अड्डा पश्चिम बंगाल के कूच बिहार और असम के तामुलपुर में थे। उन्होंने कहा, ‘धुबरी में स्थापित अड्डा सेना को अपने खुफिया तंत्र को मजबूत करने में मदद करेगा।’
बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार की पाकिस्तान के साथ सांठगांठ
सुरक्षा के लिहाज से इसके महत्व पर ज़ोर देते हुए, ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बोरठाकुर ने कहा, ‘बांग्लादेश में कार्यवाहक सरकार के सत्ता में आने के बाद से, भारत के प्रति उनका रवैया बेहद कठोर हो गया है। और पाकिस्तान के साथ उनकी सांठगांठ भी है।
पाकिस्तान से राजनेताओं और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की (बांग्लादेश की) लगातार उच्च-स्तरीय यात्राएं बेहद चिंताजनक हैं।’ सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर ने कहा, ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर हमारे लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहा है और हम किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, हम इस संबंध में और अधिक सक्रिय हो सकते हैं।’