'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' से बदली पूर्वोत्तर की तस्वीर : सिंधिया

'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' को वर्चुअली किया संबोधित कहा, त्रिपुरा में बढ़ रहा निवेश का आकर्षण

'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' से बदली पूर्वोत्तर की तस्वीर : सिंधिया
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अगरतला : केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (DoNER) और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' को वर्चुअली संबोधित करते हुए उद्योग जगत से त्रिपुरा में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक बुनियादी ढांचे और संसाधनों की उपलब्धता के कारण राज्य निवेशकों के लिए तेजी से आकर्षक केंद्र बन रहा है। सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर अब देश के विकास का महत्वपूर्ण इंजन बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' ने इस क्षेत्र की पहचान केवल सीमावर्ती क्षेत्र तक सीमित नहीं रखी, बल्कि इसे दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि इस नीति से व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय संपर्क के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे पूर्वोत्तर की रणनीतिक भूमिका और मजबूत हुई है।

त्रिपुरा को बताया निवेश का पसंदीदा गंतव्य

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव' ऐसे राज्य को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है, जो दीर्घकालिक निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अगरतला दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक रणनीतिक गेटवे के रूप में उभर रहा है और यह व्यवसायों को 67 करोड़ से अधिक आबादी वाले आसियान (ASEAN) बाजार से जोड़ने की क्षमता रखता है।

प्राकृतिक संसाधनों और बुनियादी ढांचे पर जोर

सिंधिया ने कहा कि त्रिपुरा प्राकृतिक गैस, बांस, अगरवुड, रबर, चाय, मसालों और बागवानी उत्पादों से समृद्ध राज्य है। इसके साथ ही यहां शिक्षित कार्यबल, निवेशक-अनुकूल नीतियां, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत का तीसरा अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट गेटवे भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि देश का सबसे बड़ा बांस उत्पादक और प्राकृतिक रबर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के कारण त्रिपुरा में मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, वैल्यू एडिशन, निर्यात और टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के लिए व्यापक संभावनाएं हैं।

कनेक्टिविटी परियोजनाओं से बढ़ेगा व्यापार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे और संपर्क सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया है। उन्होंने भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग, कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट, सबरूम स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन, मैत्री सेतु पुल और इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहल त्रिपुरा को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी।

'अष्टलक्ष्मी' राज्यों पर सरकार का फोकस

सिंधिया ने कहा कि निवेश से विश्वास पैदा होता है, विश्वास से बुनियादी ढांचा मजबूत होता है और मजबूत बुनियादी ढांचे से विकास का विजन साकार होता है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा का एक भू-आवेष्ठित (लैंडलॉक) राज्य से बंगाल की खाड़ी के प्रवेश द्वार तक का सफर पूर्वोत्तर में आए बड़े बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि पूर्वोत्तर के 'अष्टलक्ष्मी' राज्य भारत की अगली आर्थिक विकास गाथा का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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