अरुणाचल में बाढ़-भूस्खलन से 7 की मौत, 97 हजार से अधिक लोग प्रभावित

लगातार बारिश से 26 जिलों के 425 गांव प्रभावित कई सड़कें-पुल क्षतिग्रस्त, एनएच-13 समेत प्रमुख मार्ग बंद

अरुणाचल में बाढ़-भूस्खलन से 7 की मौत, 97 हजार से अधिक लोग प्रभावित
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ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन से हालात गंभीर बने हुए हैं। राज्य के 26 जिलों के 425 गांवों में 97,182 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 29 लोग घायल हुए हैं। कई जिलों में सड़क संपर्क बाधित है और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। सोमवार तड़के ऊपरी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद कुमे नदी में अचानक आई बाढ़ ने कुरुंग कुमे जिले के परसी-पारलो सर्किल और डामिन उपखंड में भारी तबाही मचाई। हुरी और डामिन को जोड़ने वाला पुल बह जाने से सड़क संपर्क टूट गया। परसी-पारलो सर्किल में निरीक्षण बंगला जलमग्न हो गया, दो मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा, एक चर्च क्षतिग्रस्त हो गया और पगाम गांव को जोड़ने वाला पुल भी बह गया।

शैक्षणिक संस्थानों पर भी पड़ा असर

बाढ़ का असर क्षेत्र के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान सेंट थॉमस स्कूल पर भी पड़ा। पूरा परिसर जलमग्न होने से स्कूल की इमारतें, कक्षाएं, शिक्षण सामग्री, फर्नीचर, उपकरण और शिक्षकों के आवास क्षतिग्रस्त हो गए, जिसके चलते शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित कर दी गई हैं। इस बीच, पक्के केसांग जिले में पकरो गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-13 पर बड़े भूस्खलन से यातायात ठप हो गया है। अधिकारियों के अनुसार सड़क को बहाल करने में दो से तीन दिन लग सकते हैं। प्रशासन ने अगली सूचना तक ईटानगर-सेप्पा मार्ग पर यात्रा से बचने की सलाह दी है। पश्चिम कामेंग जिले में सेला सुरंग की ओर जाने वाली सड़क का हिस्सा बह गया है, जबकि पापुम पारे जिले में शिव मंदिर के पास भूस्खलन के कारण पोतिन-किमिन मार्ग बंद है। यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

आपदा का असर कृषि और पर्यावरण पर भी पड़ा

आपदा का असर कृषि और पर्यावरण पर भी पड़ा है। 541.75 हेक्टेयर फसल क्षेत्र और लगभग 1,010 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वहीं 150 सड़कें, 19 पुल, 21 पुलियां, 221 जलापूर्ति प्रणालियां, 58 सरकारी भवन, 156 बिजली लाइनें, 224 बिजली के खंभे, 10 जलविद्युत परियोजनाएं, दो अस्पताल, तीन स्कूल तथा सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। जिला प्रशासन, अर्धसैनिक बल, पुलिस और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर बहाली का काम तेज़ी से किया जा रहा है, जबकि लोगों से मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।

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