खिलाड़ियों का वतन वापसी पर जोरदार स्वागत

राष्ट्रमंडल खेलों से स्वर्ण और रिकॉर्ड पदक जीतकर लौटे भारतीय खिलाड़ियों का दिल्ली में ढोल-नगाड़ों, देशभक्ति गीतों और फूल-मालाओं के बीच भव्य स्वागत, अगला लक्ष्य एशियाई खेलों और पैरालंपिक में तिरंगा लहराना
 खिलाड़ियों का वतन वापसी पर जोरदार स्वागत
Atul Yadav
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नयी दिल्ली : राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन कर स्वदेश लौटे भारतीय खिलाड़ियों का मंगलवार तड़के राष्ट्रीय राजधानी में भव्य स्वागत किया गया। वहीं खिलाड़ियों ने स्पष्ट किया कि जश्न मनाने के लिए उनके पास ज्यादा समय नहीं है, क्योंकि अगले महीने जापान में होने वाले एशियाई खेल अब उनका अगला बड़ा लक्ष्य है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही खिलाड़ियों का ढोल-नगाड़ों, देशभक्ति गीतों और फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। परिजन और समर्थक खिलाड़ियों के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए उत्साहित नजर आए। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली मुक्केबाज प्रिया घंघास ने कहा, ‘इतने बड़े मंच पर राष्ट्रगान सुनना जीवनभर याद रहने वाला पल है, लेकिन अब मेरा पूरा ध्यान एशियाई खेलों पर है, जहां मैं एक और स्वर्ण पदक जीतना चाहती हूं।’

भारतीय मुक्केबाजों ने राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 10 पदक जीतकर यादगार अभियान पूरा किया। महिला मुक्केबाजों ने छह और पुरुष खिलाड़ियों ने चार पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मुक्केबाजी की बढ़ती ताकत का परिचय दिया। भारतीय पैरा एथलेटिक्स दल ने भी इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड सात पदक अपने नाम किए, जिसके दम पर भारत समग्र पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा। खिलाड़ी मंगलवार तड़के करीब चार बजे जैसे ही हवाई अड्डे के टर्मिनल से बाहर निकले, ढोल-नगाड़ों की गूंज और देशभक्ति गीतों से पूरा माहौल उत्साह से भर उठा। परिजनों ने पदक विजेता खिलाड़ियों का फूल-मालाएं पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए मौजूद थे।

इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में हराने वाली पहली मुक्केबाज बनीं साक्षी चौधरी ने कहा, ‘मैं हर रात स्वर्ण जीतने, राष्ट्रगान सुनने और इसी तरह स्वागत मिलने का सपना देखती थी। अब वह सपना सच हो गया है। अगला लक्ष्य एशियाई खेल हैं और वहां भी इसी प्रदर्शन को दोहराना चाहती हूं।’ स्वर्ण पदक विजेता जैसमीन लंबोरिया ने बताया कि बीमारी के कारण उनकी तैयारियां प्रभावित हुई थीं और वह खेलों से पहले केवल तीन सप्ताह ही अभ्यास कर सकी थीं। उन्होंने कहा, ‘रिंग में उतरते ही मैंने बाकी सब कुछ भुला दिया और सिर्फ भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान केंद्रित किया।’ उन्होंने कहा कि आगामी एशियाई खेलों और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पदक जीतना उनका मुख्य लक्ष्य है। मुक्केबाज सचिन सिवाच ने भारतीय टीम की सफलता का श्रेय लंबे समय तक की गई मेहनत और तकनीकी कमियों को दूर करने को दिया।

उन्होंने कहा, ‘लगातार जीत खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाती है और अब पूरी टीम की निगाहें एशियाई खेलों पर है।’ नरेंद्र बेरवाल ने कहा कि यह सफलता व्यक्तिगत प्रदर्शन नहीं बल्कि सुनियोजित रणनीति और टीमवर्क का परिणाम है जबकि रजत पदक विजेता जादूमणि सिंह को फाइनल में मिली हार का मलाल है। उन्होंने कहा, ‘यह निराशा मुझे और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगी।’ महिला 70 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने कहा कि गत चैंपियन को हराने से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘इस जीत से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। यह भार वर्ग एशियाई खेलों में शामिल नहीं है, इसलिए अब मेरा पूरा ध्यान विश्व कप पर रहेगा।’

यह जश्न भारत के पैरा खिलाड़ियों के लिए भी खास था क्योंकि उन्होंने भी राष्ट्रमंडल खेलों में सात पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पुरुषों की 100 मीटर T-47 स्पर्धा में स्वर्ण और खेलों का नया रिकॉर्ड बनाने वाले दिलीप महादू गावित ने कहा, ‘ग्लास्गो की ठंड और नई स्पर्धा दोनों बड़ी चुनौतियां थीं। अब मेरा लक्ष्य पैरालंपिक स्वर्ण जीतकर सबसे बड़े मंच पर तिरंगा फहराना है।’ महिलाओं की गोला फेंक F57 स्पर्धा की स्वर्ण पदक विजेता शर्मिला धनखड़ ने कहा, ‘राष्ट्रमंडल खेलों का पदक जीतने से आगामी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।’

पुरुषों की एफ57 गोलाफेंक स्पर्धा के स्वर्ण पदक विजेता सोमन राणा ने कहा कि इस सफलता का श्रेय खिलाड़ियों के साथ-साथ सहयोगी स्टाफ को भी जाता है, जो पर्दे के पीछे लगातार मेहनत करते रहते हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह और अस्मिता डे मंगलवार तड़के हवाई अड्डे से बाहर निकलने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल रहे। उनका भी यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हर्ष ने कहा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह का स्वागत मिलेगा। सभी से मिलकर बेहद अच्छा लग रहा है।’ उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक अस्मिता डे ने कहा, ‘मुझे जीवन में पहली बार ऐसा स्वागत मिल रहा है और मेरे लिए यह अनुभव बेहद खास है।’

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