

निंगबो : भारत के आयुष शेट्टी ने शीर्ष वरीयता प्राप्त और गत चैंपियन कुन्लावत वितिदसर्न को शनिवार को तीन गेम के मुकाबले में हराकर बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में प्रवेश कर लिया। दुनिया के 25वें नंबर के खिलाड़ी आयुष ने पेरिस ओलंपिक रजत पदक विजेता और 2023 विश्व चैंपियन वितिदसर्न पर 10-21, 21-19, 21-17 से जीत दर्ज की। वह दिनेश खन्ना के बाद इस टूर्नामेंट के पुरुष एकल फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए। खन्ना ने 1965 में पुरुष एकल स्वर्ण जीता था। सात्विक साइराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने 2023 में खिताब जीता था।
अमेरिकी ओपन सुपर 300 चैंपियन आयुष का सामना अब चीनी ताइपै के चौथी वरीयता प्राप्त चोउ तियेन चेन या दूसरी वरीयता प्राप्त चीन के शि यू की से होगा। भारत के पूर्व मुख्य कोच और ‘सेंटर फॉर बैडमिंटन एक्सीलेंस’ के निदेशक विमल कुमार ने बताया, ‘आयुष ने स्थिति को अच्छी तरह से संभाला। ऐसा लगा कि उन्होंने अपनी आक्रामक शैली से कुन्लावत के दिमाग पर दबाव बना दिया और इसका चतुराई से फायदा उठाया।’ उन्होंने कहा, ‘दूसरा गेम जीतना बहुत अहम था। 20-14 के स्कोर पर आयुष शेट्टी पूरी तरह से नियंत्रण में लग रहे थे, लेकिन जब वितिदसर्न ने वापसी करते हुए स्कोर 20-19 कर दिया तो वह थोड़े चिंतित हो गए।
ठीक उसी समय उन्होंने कुछ विशेष किया जिससे वह गेम अपने नाम करने में कामयाब रहे।’ कुमार ने कहा, ‘पूरे हफ्ते उन्होंने मुश्किल पलों में सही रणनीति अपनाते हुए और अपने स्मैश का समझदारी से इस्तेमाल करते हुए शानदार वापसी करने की अपनी काबिलियत दिखाई है। उनका यही अनुशासन उन्हें सफलता दिलाने में मददगार साबित हुआ।’ आयुष ने फाइनल तक के सफर में एक भी गेम नहीं गंवाया था । वितिदसर्न ने उन्हें आर्कटिक ओपन में पिछले साल सीधे गेम में हराया था। वितिदसर्न ने शुरुआत में 4-0 की बढत बना ली। ब्रेक के समय स्कोर 11-5 था और पहला गेम उन्होंने आसानी से जीत लिया। दूसरे गेम में आयुष ने दमदार वापसी की और कूदकर स्मैश लगाते हुए 3-1 की बढत बनाई। यह जल्दी ही 7-1 की हो गई चूंकि वितिदसर्न ने कई सहज गलतियां की। ब्रेक के समय स्कोर 11-4 था।
आयुष ने बीच में कुछ गलतियां की जिससे वितिदसर्न ने 13-11 से वापसी की लेकिन जल्दी ही क्रॉसकोर्ट स्मैश से वापसी करते हुए स्कोर 16-11 कर लिया। बैकहैंड पर फ्लिक से आयुष ने छह अंक बनाये और दूसरा गेम अपने नाम किया। तीसरे गेम में उन्होंने 4-1 से शुरुआत की और वितिदसर्न को दबाव में ला दिया। उनकी बढत 17-10 की हो गई और आक्रामक स्ट्रोक्स से वह 19-13 से आगे हो गए। इसके बाद लगातार मैच प्वाइंट बनाकर उन्होंने जीत दर्ज की। कुमार ने कहा, ‘उसे जिस चीज की जरूरत थी, वह थी परिपक्वता। और वह यहा दिखाई दी। उसने दबाव में भी शांत और समझदारी भरा बैडमिंटन खेला। उन्होंने कहा, ‘महज 20 साल की उम्र में उसने यह परिपक्वता दिखाई। भारत के पास अब आयुष और लक्ष्य के रूप में दो मजबूत पुरुष एकल खिलाड़ी हैं और इस तरह की जीत पूरे खेल जगत के लिए बहुत मायने रखती है।’