दार्जिलिंग में रेड पांडा संरक्षण बनी नई चुनौती, जोड़ी की तलाश में जुटा चिड़ियाघर

चिड़ियाघर में हैं 20 रेड पांडा, पिछले तीन वर्षों में जन्मे करीब 10 शावक
Red panda
Red panda
Published on

सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग के पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क में दुर्लभ और संकटग्रस्त रेड पांडा के संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में चिड़ियाघर में करीब 10 रेड पांडा शावकों का जन्म हुआ है। हालांकि, अब इनके प्रजनन को बनाए रखना चिड़ियाघर प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।चिड़ियाघर के एक अधिकारी के अनुसार, रेड पांडा के संरक्षण के लिए प्रजनन प्रक्रिया को सुचारू रखना जरूरी है। लेकिन जोड़ी बनाने के दौरान कई बार नर-मादा के बीच अनुकूलता नहीं होने के कारण वे प्रजनन में रुचि नहीं दिखाते। वहीं, कुछ रेड पांडा की उम्र अधिक होने के कारण उनकी प्रजनन क्षमता भी कम हो गई है। ऐसे में चिड़ियाघर प्रबंधन अब उपयुक्त जोड़ी तलाशने पर विशेष ध्यान दे रहा है। हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक रेड पांडा देखने दार्जिलिंग चिड़ियाघर पहुंचते हैं। इसके अलावा शोधकर्ता भी इनके संरक्षण और व्यवहार पर अध्ययन के लिए यहां आते हैं। ऐसे में रेड पांडा का प्रजनन सक्रिय नहीं रहना भविष्य के संरक्षण कार्यक्रमों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। वर्तमान में चिड़ियाघर में कुल 20 रेड पांडा हैं, जिनमें 7 नर और 13 मादा हैं। इनमें 16 साल का ‘कर्मा’ और 13 साल की ‘किटची’ वरिष्ठ रेड पांडा हैं। दार्जिलिंग के रेड पांडा की पहचान देश के बाहर भी बनी है। आनुवंशिक विविधता और स्वस्थ प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए 2024 में करीब एक दशक बाद नीदरलैंड के रॉटरडैम चिड़ियाघर से दो नर रेड पांडा दार्जिलिंग लाए गए थे।वहीं, 2023 में दार्जिलिंग चिड़ियाघर से दो रेड पांडा साइप्रस के पाफोस चिड़ियाघर भेजे गए थे। चिड़ियाघर प्रबंधन का मानना है कि स्वस्थ प्रजनन बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय पशु विनिमय कार्यक्रमों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से रेड पांडा दिवस के अवसर पर शनिवार को विद्यार्थियों और पर्यटकों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।इसमें पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता के साथ रेड पांडा को सेब, अंगूर, केला, अनानास, अंडा और दूध भी दिया जाएगा।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in