सरकारी नौकरी छोड़ डेयरी फार्मिंग को बनाया करियर

पशुओं की देखभाल करते दीपेश खतीवड़ा
पशुओं की देखभाल करते दीपेश खतीवड़ा
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गंगटोक: पश्चिम सिक्किम के 23 वर्षीय दीपेश खतीवड़ा ने सरकारी नौकरी की दौड़ से अलग रास्ता चुनते हुए डेयरी फार्मिंग को अपना करियर बनाया है। आज उनका खतीवड़ा ब्रदर्स डेयरी फार्म प्रतिदिन करीब 120 लीटर दूध का उत्पादन कर रहा है। कुमाऊं विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातकोत्तर करने के बाद दीपेश ने अपने गांव लिदुंग लौटकर डेयरी व्यवसाय शुरू किया। उनके फार्म में वर्तमान में 9 गायें, 2 बछिया और 2 बछड़े हैं, जिनमें से 8 गायें दूध दे रही हैं। उत्पादित दूध सिक्किम मिल्क यूनियन को आपूर्ति किया जाता है।

दीपेश का मानना है कि मजबूत डेयरी क्षेत्र से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर सिक्किम को मिलेगा बढ़ावा

दीपेश का कहना है कि उनकी पढ़ाई ने उन्हें ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों को समझने में मदद की, जिससे उन्होंने गांव लौटकर कुछ नया करने का फैसला लिया। उनका दिन सुबह 5 बजे पशुओं की देखभाल से शुरू होता है और वे आज भी खुद दूध निकालने में हिस्सा लेते हैं। फार्म से उन्हें प्रतिदिन लगभग 5 से 6 हजार रुपये की आय हो रही है। हालांकि, उनका मानना है कि बढ़ती लागत को देखते हुए डेयरी किसानों को दूध का बेहतर मूल्य मिलना चाहिए। दीपेश ने पहाड़ी क्षेत्रों में डेयरी फार्मिंग की चुनौतियों जैसे पशु आहार की बढ़ती कीमत, पशु चिकित्सा सुविधाओं की कमी और परिवहन खर्च का भी जिक्र किया। उन्होंने युवाओं से कृषि और डेयरी क्षेत्र को सम्मानजनक एवं लाभदायक करियर विकल्प के रूप में अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि किसानों को मजबूत बनाना ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भर सिक्किम की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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