रखरखाव के अभाव में बदहाल हुई महानंदा तट की पेंटिंग, पुनरुद्धार की मांग

महानंदा नदी किनारे दीवारों पर बने पेंटिंग
महानंदा नदी किनारे दीवारों पर बने पेंटिंग
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सिलीगुड़ी : पर्वतों से घिरा सिलीगुड़ी शहर अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। मानचित्र में भी इस शहर का विशेष महत्व है, क्योंकि यह नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इसी कारण सिलीगुड़ी की रणनीतिक और सांस्कृतिक अहमियत समय के साथ बढ़ती गई है। शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर समय-समय पर विभिन्न पहलें की जाती रही हैं। महानंदा नदी को सिलीगुड़ी की जीवनरेखा माना जाता है और इसके तटों को सुंदर बनाने के लिए भी कई प्रयास किए गए हैं। इन्हीं प्रयासों की कड़ी में वर्ष 2022 में महानंदा नदी के किनारे की दीवारों पर बंगाल की लोक संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को दर्शाती आकर्षक पेंटिंग बनाई गई थीं। सिलीगुड़ी नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य शहर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ नदी संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना था। इन कलाकृतियों को लोगों ने काफी सराहा था। कलाकारों ने पेंटिंग में स्थानीय संस्कृति को इतने जीवंत रूप में उकेरा था कि सुबह और शाम बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर तस्वीरें खिंचवाते थे। महानंदा तट शहरवासियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया था। हालांकि, वर्तमान में रखरखाव के अभाव के कारण इन पेंटिंग की स्थिति दयनीय हो चुकी है। जगह-जगह रंग उखड़ गए हैं, चित्र धुंधले पड़ चुके हैं और कई स्थानों पर झाड़ियां उग आई हैं। परिणामस्वरूप, कभी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही ये दीवारें अब उपेक्षा का शिकार नजर आती हैं। इस विषय पर जब सन्मार्ग टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत की तो उन्होंने अपनी चिंताएं साझा कीं।

दीपाली नामक एक युवती ने बताया कि वह कई वर्षों से महानंदा नदी किनारे आती रही हैं। उन्होंने कहा, “जब यहां पेंटिंग बनाई जा रही थी, तब मुझे बहुत खुशी हुई थी क्योंकि इसमें हमारी संस्कृति की झलक दिखाई देती थी। मैंने भी यहां कई तस्वीरें ली थीं। लेकिन अब पेंटिंग काफी पुरानी और खराब हो चुकी हैं। काम की शुरुआत अच्छी थी, लेकिन उसका रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।

वहीं किशोर राय नामक एक युवक ने कहा कि जब वह मोटरसाइकिल से इस मार्ग से गुजरते थे, तो इन पेंटिंग को ध्यान से देखते थे। इन चित्रों में अपनेपन का एहसास होता था, जो मुझे बहुत अच्छा लगता था। लेकिन अब इनकी चमक फीकी पड़ गई है और लोगों की दिलचस्पी भी कम हो गई है,।

एक स्थानीय गृहिणी ने बताया कि जब यह परियोजना शुरू हुई थी, तब लोगों को उम्मीद थी कि प्रशासन समय-समय पर इसकी देखभाल करेगा और इसमें नए बदलाव भी देखने को मिलेंगे। लेकिन 2022 के बाद से इसके संरक्षण पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया।

वहीं एक चाय विक्रेता ने बताया कि पहले शाम के समय बड़ी संख्या में लोग पेंटिंग देखने आते थे और दीवारों के सामने विभिन्न अंदाज में फोटो खिंचवाते थे। लोग नदी किनारे बैठकर इन कलाकृतियों की प्रशंसा भी किया करते थे। लेकिन अब चित्रों के धुंधले पड़ जाने के कारण लोग उनकी ओर ध्यान भी नहीं देते।

महानंदा तट पर आने वाले युवाओं ने प्रशासन से अपील की है कि इस दिशा में पुनः ध्यान दिया जाए। उनका कहना है कि जिस उद्देश्य के साथ शहर के सौंदर्यीकरण की मुहिम शुरू की गई थी, उसे निरंतर जारी रखना आवश्यक है। सिलीगुड़ी एक सुंदर और महत्वपूर्ण शहर है तथा महानंदा नदी इसकी पहचान का अहम हिस्सा है। ऐसे में शुरू किए गए विकास और सौंदर्यीकरण कार्यों का नियमित रखरखाव करना प्रशासन की जिम्मेदारी भी है।

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