NH-10 की बंदी में रियायत, खुशी

NH-10 की बंदी में रियायत, खुशी
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सिलीगुड़ी : पश्चिम बंगाल व सिक्किम समेत पूर्वोत्तर भारत के बीच कनेक्टिविटी की जीवन रेखा सरीखे NH-10 पर सेवक-रंगपो सेक्शन में अगले चार महीने तक अलग-अलग तारीखों को रात के समय यातायात पर पूर्ण प्रतिबंध में अब कुछ रियायत दी गई है। पर्यटन व परिवहन जगत के संगठनों की मांगों के मद्देनजर नेशनल हाई-वेज़ एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) की पीएमयू-सिलीगुड़ी इकाई ने यह निर्णय लिया है व इस बाबत नया आदेश जारी किया है। इस रियायत के आदेश पर पर्यटन व परिवहन जगत के संगठनों एवं लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की है और एनएचआईडीसीएल के प्रति प्रसन्नता व्यक्त की है।

एनएचआईडीसीएल के नए आदेश के तहत यह है कि, पहले जो अलग-अलग निर्धारित तिथियों में एनएच-10 के सेवक-रंगपो सेक्शन में शाम 07:00 बजे से अगली सुबह 06:00 बजे तक यातायात पूरी तरह बंद रहने समायवधि थी व है अब रात 09:00 बजे से अगली सुबह 06:00 बजे तक कर दी गई है। इसी तरह रात्रिकालीन यातायात बंदी की पहले चरण की कालावधि जो पहले 5 अक्टूबर 2026 से 17 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित थी उसे अब 07 अक्टूबर 2026 से 15 अक्टूबर 2026 तक किया गया है। वहीं, दूसरे चरण की रात्रिकालीन यातायात बंदी की कालावधि जो 26 अक्टूबर 2026 से 07 नवंबर 2026 थी, उसमें भी कमी की गई है। इसकी नई कालावधि 26 अक्टूबर 2026 से 05 नवंबर 2026 रहेगी।

एनएचआईडीसीएल के नए आदेश के तहत NH-10 के सेवक कोरोनेशन ब्रिज (किलोमीटर 0.00) से रंगपो (किलोमीटर 52.100) सेक्शन तक उपरोक्त कालावधि व समयावधि में हर प्रकार के वाहनों की रात्रिकालीन आवाजाही पर रोक रहेगी।आदेश में कहा गया है कि, जन-सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, NH-10 के सेवक-रंगपो सेक्शन के किनारे पहाड़ी की तरफ़ ढलान की सुरक्षा और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) से बचाव के लिए प्रस्तावित खुदाई के काम को देखते हुए, यह रोक लगाई जा रही है।काम की प्रगति और मौजूदा सुरक्षा ज़रूरतों के आधार पर बाद के चरणों में वाहनों की आवाजाही पर किसी भी तरह की और रोक/बंद की ज़रूरत पड़ने पर, सक्षम अधिकारी द्वारा अलग से सूचना दी जाएगी। इसे लेकर ज़िला प्रशासन और संबंधित अधिकारी पाबंदी की अवधि के दौरान ट्रैफ़िक की सुचारू और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए, ज़रूरत के अनुसार ट्रैफ़िक प्रबंधन के ज़रूरी इंतज़ाम कर सकते हैं, जिसमें उपयुक्त डायवर्ज़न और रेगुलेशन के उपाय शामिल हैं।

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