

सिलीगुड़ी : गणेश पूजा और विश्वकर्मा पूजा को लेकर मूर्तिकार इन दिनों काफी व्यस्त हैं। कोई गणेश की मूर्ति को अंतिम रूप देने में जुटा है, तो कोई विश्वकर्मा की प्रतिमा तैयार कर रहा है। अलग-अलग आकार और डिजाइन की कई आकर्षक गणेश प्रतिमाएं भी बनाई जा रही हैं। लेकिन इस व्यस्तता के बीच मूर्तिकार की चिंता भी बढ़ गई है। दरअसल, मूर्ति बनाने में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी, बांस, सुतली की रस्सी, कपड़ा, रंग और सजावट के सामान समेत लगभग सभी कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर मूर्ति बनाने की लागत पर पड़ा है। हालांकि, लागत बढ़ने के बावजूद मूर्तिकार अपनी मर्जी से मूर्तियों की कीमत नहीं बढ़ा सकते। उन्हें डर है कि कीमत बढ़ाने पर ग्राहक कम हो सकते हैं। इसलिए इस बार ज्यादातर कुम्हार और मूर्तिकार ‘ऑर्डर के अनुसार काम’ करने की नीति अपना रहे हैं। बिना ऑर्डर के अतिरिक्त मूर्तियां बनाकर पैसा फंसाने का जोखिम वे नहीं लेना चाहते।
गणेश पूजा में अब सिर्फ सात दिन बाकी हैं। ऐसे में शिल्पकार हाथ में मौजूद ऑर्डर की मूर्तियों को जल्द से जल्द पूरा करने में जुटे हुए हैं। वहीं, दुर्गापूजा भी करीब है। पूजा में अब लगभग एक महीने का समय बचा है। कुम्हारटोली में पहले ही कई दुर्गा प्रतिमाओं के ऑर्डर पहुंच चुके हैं। लेकिन अतिरिक्त मूर्तियां बनाने को लेकर मूर्तिकार इस बार काफी सतर्क हैं। मूर्तिकारों की आशंका है कि इस बार सभी पूजा समितियों को सरकारी सहायता नहीं मिल पाएगी। ऐसे में अगर पूजा का बजट कम होता है, तो उसका असर मूर्तियों की खरीद पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से बिना ऑर्डर के मूर्ति तैयार करके अपना पैसा फंसाने का जोखिम शिल्पकार नहीं उठाना चाहते।एक तरफ कच्चे माल की कीमत लगातार बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ मूर्तियों की कीमत बढ़ाने पर ग्राहकों की संख्या कम होने का डर है। इन दोनों परिस्थितियों के बीच शिल्पकार काफी सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं।हालांकि, त्योहारों के मौसम में कुम्हारटोली की रौनक कम नहीं हुई है। दिन-रात मेहनत कर मूर्तिकार मिट्टी को आकार दे रहे हैं। उनके हाथों के हुनर से धीरे-धीरे जीवंत रूप ले रहे हैं विघ्नहर्ता गणेश, भगवान विश्वकर्मा और मां दुर्गा की प्रतिमाएं।