चरणजीत कौर मामले में अल्पसंख्यक आयोग ने किया हस्तक्षेप

चरणजीत कौर मामले में अल्पसंख्यक आयोग ने किया हस्तक्षेप
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सिलीगुड़ी : शहर की 14 वर्षीया किशोरी चरणजीत कौर की गैर-जिम्मेदाराना मेडिकल परिसेवा व लापरवाही के चलते हुई दुखद मौत के मामले में अब पश्चिम बंगाल राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने भी हस्तक्षेप किया है व त्वरित न्याय सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उक्त आयोग के चेयरमैन अहमद हसन इमरान व सदस्य सतनाम सिंह अहलूवालिया के पास एक औपचारिक शिकायत आने के मद्देनजर आयोग ने इसे गंभीरता से संज्ञान में लिया है। आयोग सदस्य सतनाम सिंह अहलूवालिया गत 7 मार्च को सिलीगुड़ी आए। वह दिवंगत चरणजीत कौर के परिवार से मिले व उनकी बातें सुनीं। उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि आयोग इस मामले को गंभीरता से लेगा और निष्पक्ष व पारदर्शी जांच करवा कर त्वरित न्याय सुनिश्चित करने हेतु सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे।

पीड़ित परिवार से मिलने के बाद, परिवार की चिंताओं के मद्देनजर सतनाम सिंह अहलूवालिया ने सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस कमिश्नर सी. सुधाकर के साथ एक बैठक की। बैठक में डिप्टी कमिश्नर (ईस्ट जोन) राकेश सिंह, सहायक कमिश्नर पूर्णिमा शेरपा व अन्य वरीय पुलिस अधिकारी शामिल हुए। उन्होंने पीड़ित परिवार की गंभीर चिंताओं से पुलिस अधिकारियों से अवगत कराया व आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच को और ज़्यादा मेहनत व संवेदनशीलता संग आगे बढ़ाने को कहा। पुलिस कमिश्नर ने भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी व कानूनी तौर पर सही तरीके से आगे बढ़ेगी।

पीड़ित परिवार की तत्काल ज़रूरतों को समझते हुए, सतनाम सिंह अहलूवालिया ने जलपाईगुड़ी की डीएम शमा परवीन को भी ज़मीनी हालात से अवगत कराया और इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवार के लिए आवश्यक प्रशासनिक सहायता का आग्रह किया। दिवंगत चरणजीत कौर के दुखी पिता रबिंदर सिंह ने उद्गार व्यक्त किया कि, हमारी बेटी के जाने से हमारा परिवार टूट गया है लेकिन हमें तसल्ली है कि जैसे ही ज़रूरी शिकायत दर्ज की गई, पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक आयोग ने मामले को तत्काल संज्ञान में लिया। आयोग सदस्य सतनाम सिंह अहलूवालिया के तुरंत यहां आने और हस्तक्षेप करने से हमें भरोसा मिला है कि हमारी आवाज़ सुनी जा रही है और इंसाफ़ मिलेगा। ऐसे ही उद्गार दिवंगत चरणजीत कौर के चाचा मंजीत सिंह ने भी व्यक्त किए।

अपने दौरे के दौरान, आयोग सदस्य सतनाम सिंह अहलूवालिया ने सिख समुदाय के सदस्यों और सिलीगुड़ी में गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के प्रतिनिधियों संग भी बातचीत की जिनमें श्री गुरु सिंह सभा, सिलीगुड़ी के अध्यक्ष जगमोहन सिंह भोगल, पूर्व अध्यक्ष सीए जी. एस. होरा आदसिम्मिलित रहे। उन्होंने आयोग सदस्य सतनाम सिंह अहलूवालिया की तत्काल पूरी सक्रियता संग आवश्यक पहल की खूब सराहना की।

इस अवसर पर आयोग सदस्य सतनाम सिंह अहलूवालिया ने कहा कि, एक जवान जान का जाना बहुत दर्दनाक है और गंभीर सवाल खड़े करता है। इस मामले को पूरी संवेदनशीलता और ज़िम्मेदारी के साथ सुलझाया जाना चाहिए। यहां मुख्य चिंता मेडिकल लापरवाही का आरोप और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान एक परेशान परिवार का शोषण है। पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक आयोग ने शिकायत का संज्ञान लिया है। हम यह सुनिश्चित करने को समर्पित हैं कि मामले की पूरी तरह से, पारदर्शी व सही तरीके से कानून के अनुसार जांच की जाए व अविलंब न्याय सुनिश्चित किया जाए।

उल्लेखनीय है कि, 14 वर्षीया किशोरी चरणजीत कौर को 1 जनवरी 2026 को सांस लेने में गंभीर दिक्कतें होने के बाद सिलीगुड़ी के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। वहां पता चला कि उसे एक्यूट न्योमोनिया है। जैसे-जैसे उसकी हालत बिगड़ती गई, इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कथित तौर पर सलाह दी कि उसे तुरंत एडवांस्ड इलाज की सुविधाओं वाले किसी बड़े मेडिकल सेंटर ले जाया जाए। परिवार की शिकायत के मुताबिक, उस मुश्किल समय में उन्होंने इंश्योरेंस एजेंट संतोष गुप्ता से संपर्क किया, जिसने दावा किया कि वह बागडोगरा एयरपोर्ट से 18 लाख रुपये में एक इमरजेंसी एयर एम्बुलेंस का इंतज़ाम कर सकता है, ताकि मरीज को तुरंत चेन्नई ले जाया जा सके और बेहतर मेडिकल केयर मिल सके। एक बार जब परिवार यह रकम अरेंज कर देगा और पेमेंट कर देगा, तो वह इंश्योरेंस कंपनी से पैसे वापस ले लेगा। अपनी बेटी की जान बचाने की पूरी कोशिश में, रकम पर बातचीत करने के बाद परिवार ने एक बड़ी रकम का इंतज़ाम किया। बताया जा रहा है कि ₹12.5 लाख नकद इस भरोसे पर दिए गए कि एयर एम्बुलेंस का इंतज़ाम हो गया है। मगर, इंश्योरेंस एजेंट संतोष गुप्ता परिवार को यह कहते रहे कि एम्बुलेंस प्रोसेस में है। परिवार को बाद में पता चला कि ऐसी कोई एयर एम्बुलेंस बुक नहीं की गई थी। जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी के दौरान बहुत देर हो गई और 4 जनवरी 2026 को चरणजीत कौर की मौत हो गई। दुखी परिवार ने आरोप लगाया है कि झूठे आश्वासन की वजह से हुई देरी चलते ही उनकी बेटी को समय पर मेडिकल मदद नहीं मिल पाई, जिससे उसकी जान चली गई जो कि बच सकती थी।

पीड़ित परिवार ने यह आरोप भी लगाया है कि, इस मामले के जांच अधिकारी अबीर कुमार धर व आईसी अमित अधिकारी ने शिकायत प्रक्रिया के शुरुआती चरण में उन्हें गलत तरीके से गाइड किया और वैसे नाजुक हालात में उनसे कमजोर व झूठे बयान देने को कहा, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं, जबकि वे पहले से ही एक बहुत बड़े नुकसान से जूझ रहे थे।

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