

सिलीगुड़ी : कंफेडेरेशन ऑफ़ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशन (सीडब्ल्यूबीटीए) की उत्तर बंगाल इकाई ने आकलन वर्ष 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। इसे लेकर भारत सरकार की वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजा गया है। सीडब्ल्यूबीटीए की उत्तर बंगाल इकाई के अध्यक्ष खोकन भट्टाचार्य एवं महासचिव गोपाल खोरिया ने विज्ञप्ति द्वारा यह जानकारी दी है। वित्त मंत्री को लिखे पत्र द्वारा मांग की गई है कि आकलन वर्ष 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की वर्तमान निर्धारित अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 को कम से कम एक माह बढ़ा कर 31 अक्टूबर 2026 तक करने पर कृपया विचार किया जाए।
यह निवेदन भी किया गया है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अगस्त माह के अंत तक आयकर रिटर्न दाखिल करने एवं अन्य संबंधित कार्यों में काफी व्यस्त रहते हैं। इस कारण वे टैक्स ऑडिट का कार्य निर्धारित अवधि की शुरुआत से ही पूरी क्षमता के साथ शुरू नहीं कर पाते हैं। इसके अतिरिक्त, टैक्स अनुपालन के लिए आवश्यक विभिन्न यूटिलिटीज, सिस्टम अपडेट, फॉर्म, सूचनाएं एवं अन्य सुविधाएं कई बार आयकर विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अनुपालन अवधि के बाद के चरण में ही उपलब्ध या अपडेट होती हैं। ऐसी स्थिति में टैक्स ऑडिट की प्रक्रिया भी शुरुआत से पूरी प्रभावशीलता के साथ आगे नहीं बढ़ पाती।
ऐसे में रिटर्न दाखिल करने की अवधि समाप्त होने के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को बहुत कम समय में बड़ी संख्या में टैक्स ऑडिट पूरे करने होते हैं। दूसरी ओर, व्यापारियों एवं अन्य करदाताओं को ऑडिट के लिए बही-खाते, GST रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, TDS/TCS विवरण, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, विभिन्न मिलान विवरण तथा अन्य आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करानी होती हैं। एक उचित टैक्स ऑडिट केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। चार्टर्ड अकाउंटेंट को रिकॉर्ड की जांच, खातों का मिलान, लेन-देन का सत्यापन, विसंगतियों की पहचान, आवश्यक प्रश्न उठाने तथा उन पर करदाता के साथ चर्चा करने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। करदाता को भी आवश्यक स्पष्टीकरण देने, दस्तावेज उपलब्ध कराने तथा अपने व्यवसाय पर लागू कर प्रावधानों एवं अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को समझने के लिए पर्याप्त समय चाहिए।
सो, कम समय में अत्यधिक कार्यभार के कारण व्यापारियों एवं अन्य करदाताओं को विस्तृत चर्चा, स्पष्टीकरण और उचित पेशेवर मार्गदर्शन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इससे ऑडिट की गुणवत्ता और उसकी पूर्णता भी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि उचित सत्यापन, मिलान तथा विसंगतियों की पहचान के लिए अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने से पहले पर्याप्त समय आवश्यक है। अतः यह विषय केवल टैक्स प्रोफेशनल्स को अतिरिक्त समय देने तक सीमित नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को उचित पेशेवर मार्गदर्शन मिले और उनका टैक्स ऑडिट पर्याप्त समय लेकर सावधानीपूर्वक, सही तरीके से तथा उचित सत्यापन के बाद पूरा किया जाए।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आकलन वर्ष 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि को कम से कम एक माह बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 तक करने की कृपा की जानी चाहिए।