राज्य में परिवर्तन, NBU में नहीं, रोष

एनबीयू में ढाई साल से भी अधिक समय से स्थायी वाइस चांसलर नहीं, अन्य कई उच्च पद भी खाली, गत सवा साल से अधिक समय से अस्थायी वीसी तक की भी नियुक्ति नहीं हो रही, स्थायी रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी व परीक्षा नियंत्रक जैसे पद भी बाट जोह रहे
राज्य में परिवर्तन, NBU में नहीं, रोष
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इरफान-ए-आजम, सिलीगुड़ी : राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया लेकिन नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी (एनबीयू) की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं हो पा रहा है। एनबीयू में गत ढाई साल से भी अधिक समय से स्थायी वाइस चांसलर (वीसी) यानी उप-कुलपति नहीं हैं। गत सवा साल से अधिक समय से अस्थायी वीसी तक की भी नियुक्ति नहीं हो रही है। केवल पूर्णकालिक वीसी ही नहीं बल्कि स्थायी रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी व परीक्षा नियंत्रक जैसे सर्वोच्च पद भी खाली पड़े हैं। इधर, संयुक्त रजिस्ट्रार के रूप में डॉ. स्वपन कुमार रक्षित किसी तरह कार्य संभाल रहे हैं। इन सबके अलावा एनबीयू में शिक्षक व गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भी अनेक रिक्तियां हैं। अनेक पदों पर अस्थायी शिक्षक कर्मचारीयों व गैर-शिक्षक कर्मचारियों द्वारा जो काम चलाया जा रहा है वह भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था से लेकर प्रबंधन व प्रशासनिक व्यवस्था सब कुछ चरमरा कर रह गई है।

पश्चिम बंगाल राज्य के 36 में से 33 विश्वविद्यालयों में पूर्णकालिक वीसी की नियुक्ति का मामला हल हो गया है। केवल 3 विश्वविद्यालय में मसला बरकरार है। उनमें एक एनबीयू है। राज्य की पिछली ममता सरकार और तत्कालीन राज्यपाल (राज्य के विश्वविद्यालयों के चांसलर) के बीच रार के चलते यह मामला लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन रहा। इधर, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बीते 8 मई को दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के बायो-टेक्नोलोजी विभाग के प्रोफेसर द्वेपायन भारद्वाज के एनबीयू में पूर्णकालिक वाइस चांसलर (वीसी) नियुक्त होने की खबर आई। राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग एवं राज्य के विश्वविद्यालयों के चांसलर राज्यपाल द्वारा एनबीयू के वीसी के लिए जिन 3 नामों की सूची भेजी गई थी उसमें दूसरे नंबर के नाम यानी जेएनयू के बायो-टेक्नोलोजी विभाग के प्रोफेसर द्वेपायन भारद्वाज के नाम पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मंजूरी भरी मुहर लगाई थी। मगर, उन्होंने यहां पदभार ग्रहण नहीं किया।

इधर, बीते 9 जुलाई को राज्यपाल आर.एन. रवि ने बहैसियत राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपति (चांसलर) राज्य के कुल 20 विश्वविद्यालयों के उप-कुलपतियों संग बैठक की लेकिन इसमें खुद एनबीयू के ही उपकुलपति नदारद रहे। क्योंकि, एनबीयू में स्थायी या अस्थायी वीसी हैं ही नहीं। इस बारे में तब राज्यपाल भी कुछ कहने से कन्नी काट गए। बस, इतना कहा कि, मसला जल्द ही हाल हो जाएगा।

अब इस मुद्दे को लेकर नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी एल्यूमनी एसोसिएशन ने आंदोलन की चेतावनी दी है। इसके अध्यक्ष डॉ. तापस कुमार चटर्जी व सचिव फजलुर्रहमान ने कहा कि, हम लोगों ने बीते 4 अगस्त को ही राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री को चिट्ठी भेज कर बैठक के लिए समय मांगा है। यदि वह समय देते हैं तो उनके समक्ष पूरी वस्तुस्थिति रख कर समाधान की मांग करेंगे। वरना, आंदोलन का रास्ता तो खुला ही है। वहीं, दूसरी ओर, इस बारे में पूछे जाने पर सिलीगुड़ी के विधायक व राज्य सरकार के संसदीय मामलों एवं पर्यटन विभाग के मंत्री शंकर घोष ने कहा कि, यह वास्तव में चिंता का विषय है। इसे लेकर मैं स्वयं शिक्षा मंत्री से मिलूंगा और यथाशीघ्र समस्या के समाधान का प्रयास करवाऊंगा। वहीं, एनबीयू जिस विधानसभा क्षेत्र में है उसके भी विधायक व राज्य के वित्त राज्यमंत्री एवं परिवहन राज्यमंत्री ने आनंदमय बर्मन ने भी ऐसा ही आशय व्यक्त किया है।

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