‘जो वर्षों में नहीं हुआ वह चंद महीनों में हुआ’

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पश्चिम बंगाल राज्य की पिछली सरकारों की तुलना में वर्तमान भाजपा सरकार की भुरि-भुरि प्रशंसा की
‘जो वर्षों में नहीं हुआ वह चंद महीनों में हुआ’
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अलीपुरदुआर/सिलीगुड़ी : केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि, पश्चिम बंगाल में जो कार्य वर्षों में नहीं हुआ वह भाजपा की डबल इंजन सरकार ने चंद महीनों में ही पूरा कर दिखाया है। वह शुक्रवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में बक्सा टाइगर रिजर्व में रॉयल बंगाल टाइगरेस (बाघिन) को छोड़े जाने के उपलक्ष्य में अलीपुरदुआर में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे‌। उन्होंने कहा कि, बक्सा जंगल भारत के सबसे खूबसूरत जंगलों में से एक है और यहां बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण मौजूद है। बक्सा में बाघों की वापसी की दिशा में आज का दिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां अर्सों पहले कभी बाघों की मौजूदगी हुआ करती थी लेकिन कालांतर में यहां से बाघ गायब हो गए। वर्ष 2018 में की गई बाघ गणना के दौरान बक्सा में कोई बाघ नहीं मिला था। हालांकि, कैमरा ट्रैप में पड़ोसी भूटान और असम की ओर से आने वाले बाघों की तस्वीरें कभी-कभी सामने आई थीं।

उन्होंने आगे कहा कि, 2018 के बाद बक्सा में बाघों की स्थिति और यहां बाघ पुनर्वास की संभावनाओं को लेकर अध्ययन कराया गया। देश भर के वन्य प्राणी संरक्षण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों से राय ली गई।विशेषज्ञों ने बक्सा को बाघों के लिए उपयुक्त क्षेत्र बताया। तत्कालीन सरकार को इस संबंध में कई बार पत्र लिखे गए लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, वर्ष 2018 से 2026 के बीच जो काम नहीं हो पाया उसे मौजूदा राज्य सरकार ने चंद महीनों में ही कर दिखाया है। बक्सा में पर्याप्त क्षेत्र उपलब्ध हैं और कोर क्षेत्र से जुड़े दो गांवों को विशेष पैकेज के तहत स्थानांतरित भी किया जाना है। मगर, गांवों का स्थानांतरण व ग्रामीणों का पुनर्वास जबरदस्ती नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति कोर एरिया से स्थानांतरित नहीं होना चाहता, तो उसके साथ जोर-जबरदस्ती नहीं होगी।

इस दिन बक्सा में लाई गई बाघिन के अलावा अन्य तीन रॉयल बंगाल टाइगर (बाघों) को भी वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (बिहार) से लाने की योजना पर काम किए जाने की जानकारी भी केंद्रीय मंत्री ने दी। उन्होंने कहा कि, नए बाघों के आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण उनकी नए वातावरण में अनुकूलन क्षमता होगी और इसी कारण एक ही क्षेत्र से बाघ लाने का प्रयास किया जा रहा है। राजस्थान के सरिस्का और मध्य प्रदेश के पन्ना में हुए टाइगर री-इंट्रोडक्शन कार्यक्रमों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि, वहां बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है और बक्सा में भी आने वाले समय में सकारात्मक परिणाम देखने की उम्मीद है।

उन्होंने बफर जोन में इको-टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ाने पर भी जोर दिया। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इससे स्थानीय समुदाय की आर्थिक क्षमता और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। बक्सा में बाघों की वापसी केवल वन्यजीव संरक्षण का विषय नहीं बल्कि स्थानीय समुदाय और पर्यटन के विकास से भी जुड़ी हुई है। बाघिन की सफल वापसी के बाद अब बक्सा में आने वाले समय में अन्य बाघों को लाने की तैयारी है। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण, स्थानीय समुदाय और पर्यटन के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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