ठंड में बढ़ता प्रदूषण बन रहा है बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा

प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है क्योंकि उनका श्वसन तंत्र अधिक संवेदनशील होता है।
ठंड में बढ़ता प्रदूषण बन रहा है बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा
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कोलकाता : सर्द मौसम में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। तापमान में हो रही गिरावट और धुंध के कारण एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) का स्तर 300 के पार पहुंच रहा है। वायु गुणवत्ता का ‘बहुत खराब’ श्रेणी में होना स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

खांसी और सांस लेने में तकलीफ

अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अक्षित गुप्ता ने बताया कि 300 से ऊपर का एक्यूआई फेफड़ों के लिए उतना ही हानिकारक हो सकता है जितना कि सिगरेट का धुआं। प्रदूषण के बारीक कण (पीएम2.5) फेफड़ों में गहराई तक जाकर सूजन और लंबे समय तक नुकसान पैदा करते हैं। इससे न केवल अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है, बल्कि स्वस्थ लोगों में भी लगातार खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण चिन्हित किए जा रहे हैं।

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मेडिटेशन से होते हैं कई फायदे

गर्भवती महिलाओं पर भी असर

डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है क्योंकि उनका श्वसन तंत्र अधिक संवेदनशील होता है।

घर के अंदर व्यायाम करें

डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण के दौरान बाहर टहलने के बजाय घर के अंदर व्यायाम करना चाहिए। बाहर निकलते समय सर्जिकल मास्क का सही तरीके से उपयोग करें और इसे दोबारा इस्तेमाल करने से बचें। अगर खांसी दो सप्ताह से अधिक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें क्योंकि शुरुआती इलाज ही फेफड़ों को गंभीर नुकसान से बचा सकता है।

इनहेलर पूरी तरह सुरक्षित

अक्सर लोग अस्थमा या अन्य समस्याओं के लिए इनहेलर का उपयोग करने से डरते हैं, उन्हें लगता है कि इसकी आदत पड़ जाएगी। डॉ. गुप्ता ने कहा कि इनहेलर पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके साथ ही, एयर प्यूरीफायर खरीदते समय सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि इनकी प्रभावशीलता पर सीमित वैज्ञानिक प्रमाण हैं।

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