

कालियागंज : दुर्गापूजा में अब करीब एक महीने का समय बाकी है। इसके साथ ही उत्तर दिनाजपुर जिले के जलाशयों में लाल-नीले कमल खिलने लगे हैं। महाष्टमी की संधिपूजा में 108 कमल की विशेष जरूरत होती है। ऐसे में कालियागंज, रायगंज और इटाहार के कमल किसान अभी से बेहतर उत्पादन और पूजा के दौरान अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।पिछले वर्षों में पूजा के समय स्थानीय स्तर पर कमल की आपूर्ति कम पड़ने के कारण आढ़तदारों को हावड़ा, कोलाघाट के अलावा ओडिशा और बिहार के कोल्ड स्टोरेज पर निर्भर रहना पड़ता था। इस बार मौसम अनुकूल रहने से कालियागंज के सीमावर्ती निचले इलाकों तथा रायगंज और इटाहार के प्राकृतिक जलाशयों में कमल की फसल अच्छी होने की उम्मीद है।कालियागंज में करीब दो दशक से कमल की खेती कर रहे किसान सुभाष सरकार और अमल प्रामाणिक ने बताया कि आषाढ़ में लगाए गए कंद अब बड़े-बड़े पत्तों में फैल गए हैं और कई जगह कलियां भी आने लगी हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले एक महीने में प्राकृतिक आपदा या असमय भारी बारिश नहीं हुई तो स्थानीय ताजे कमल से जिले की बड़ी जरूरत पूरी की जा सकती है।
कालियागंज के ताराबाजार के फूल विक्रेता भी इस बार उत्साहित हैं। उनका कहना है कि कोल्ड स्टोरेज में रखे फूलों की तुलना में स्थानीय ताजा कमल अधिक आकर्षक और ताजा रहता है। पूजा के दौरान पुरोहितों और श्रद्धालुओं के बीच इसकी मांग भी बढ़ जाती है।फिलहाल स्थानीय बाजार में एक कमल 5 से 8 रुपये में बिक रहा है। किसानों और व्यापारियों का अनुमान है कि अष्टमी के दिन मांग बढ़ने पर कीमत 15 से 30 रुपये तक पहुंच सकती है। अब किसानों की नजर मौसम और पूजा के बाजार पर टिकी है।