

जैसलमेर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवर को कहा कि हम अपने एकत्व को नहीं पहचानते, इसलिए दुनिया भर में कलह थमती नहीं है और युद्ध चलते रहते हैं। भागवत ने कहा कि लोग मन की करूणा भूल गए हैं और इस सत्य को भूल गए कि हम दिखते अलग अलग हैं लेकिन हम सब एक हैं।
संघ प्रमुख जैसलमेर में जैन समुदाय के 'चादर महोत्सव' के उद्घाटन के अवसर पर ‘धर्म सभा’ में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, मन की करूणा लोग भूल गए हैं, क्योंकि इस सत्य को भूल गए कि हम दिखते अलग-अलग हैं, लेकिन हम सब एक हैं। इसलिए कलह कभी थमती नहीं, युद्ध चलते रहते हैं।
उन्होंने कहा, पहला महायुद्ध हुआ। यह फिर से न हो इसलिए 'लीग आफ नेशंस' की स्थापना हुई। लेकिन वह नहीं चली। फिर दूसरा महायुद्ध हुआ। यह फिर से न हो इसलिए संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई। लेकिन अब देख रहे हैं कि क्या हालात हैं। वह अपनी जगह पर है, निष्प्रभावी है। जो युद्ध चल रहे हैं वे थम नहीं रहे।
भागवत ने कहा, ये झगड़े क्यों होते हैं ? हम पहचानते नहीं हमारे एकत्व को। इसलिए झगड़े होते हैं। समय बड़ा कठिन है। और समय के साथ अपने देश की, अपने समाज, अपने धर्म की होड़ है। आक्रमण वगैरह तो है ही। ये आक्रमण भी इसलिए चल रहे हैं कि हम लोग सोए हैं। हम लोग बटें हैं।
उन्होंने कहा, हमलोग अपने जीवन में भेद व स्वार्थां को तिलांजलि दे दें और देश के लिए जीने मरने पर उतारू हो जाएं तो हमारा समाज अच्छा बनेगा। हमारे सारे भेद व कलह समाप्त हो जायेंगे। भारत देश परम वैभव संपन्न तो बनेगा ही, लेकिन विश्वगुरु बनकर एक नयी सुखी सुन्दर दुनिया को जन्म देगा।
आपसी सद्भाव का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, कहीं विवाद को सुलझाना है तो समझौता उसका रास्ता नहीं होता। तर्क उसका रास्ता नहीं होता। उसका रास्ता होता है सद्भावना। तभी हल निकलता है। बिना सद्भावना के हल नहीं निकलता। इसलिए उस सद्भावना को लेकर धीरे धीरे हमको पूरे समाज को तैयार करना है।
उन्होंने कहा, सब कलह मिट जाएं। हम सब खड़े हो जाएं। दुनिया में धर्म की रक्षा करने के लिए दुनिया के और सारे लोगों को अपने अपने रुचि, प्रकृति, पंरपरा के अनुसार मोक्ष मार्ग मिले, संप्रदाय मिले, इसके लिए दुनिया एक नई सुंदर सुखी दुनिया बने इसके लिए हम को पहले एक भेदरहित, स्वार्थरहित, समतायुक्त, शोषणमुक्त समाज बनके खड़ा होना है।
महोत्सव स्थल पर पहुंचने से पहले भागवत सोनार किले की गलियों में ई-रिक्शा से घूमे और पार्श्वनाथ जैन मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने दादा गुरुदेव की स्मृति में एक स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट का भी विमोचन किया।
उल्लेखनीय है कि गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरी जी की पावन निश्रा में आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय चादर महोत्सव के तहत शनिवार को विश्वभर में एक साथ एक करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ का ऐतिहासिक महासंकल्प रहेगा। निर्धारित समय पर देश विदेश में श्रद्धालु एक साथ पाठ करेंगे।