रामनवमी शोभायात्रा के दौरान मुस्लिम समुदाय ने पुष्पवर्षा कर दिखाया साम्प्रदायिक सौहार्द

मुस्लिम समाज ने रामनवमी शोभायात्रा का फूलों और पानी से किया स्वागत
जयपुर में रामनवमी पर भव्य शोभायात्रा
जयपुर में रामनवमी पर भव्य शोभायात्रा
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जयपुर : राजस्थान की राजधानी जयपुर में गुरुवार को रामनवमी की भव्य शोभायात्रा के दौरान तब साम्प्रदायिक सौहार्द का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब मुस्लिम समुदाय ने यहां हसनपुरा क्षेत्र में श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।

शोभायात्रा जब मुस्लिम बहुल हसनपुरा क्षेत्र से गुजरी, तो स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा की और पानी की बोतलें वितरित कीं। यह एकता और आपसी सम्मान का प्रतीक था।

राम राज्य संकल्प सेवा समिति द्वारा आयोजित यह शोभायात्रा जैकब रोड स्थित प्राचीन शिव हनुमान मंदिर से प्रारंभ हुई। हसनपुरा में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गुलाब और गेंदे के फूलों से हिंदू श्रद्धालुओं स्वागत किया, पानी की बोतलें बांटीं और 'जय श्री राम' के जयकारे लगाए। मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं ने मिलकर स्वागत में भाग लिया।

राजीव नगर विकास समिति के अध्यक्ष नासिर कुरैशी और अयूब खान ने कहा कि भारत सभी धर्मों की एकता से मिलकर बना है, जैसे फूलों का गुलदस्ता। हम दीपावली, होली और ईद पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और सौहार्द से रहते हैं।

स्थानीय निवासी इस्लाम कुरैशी और हारून ने कहा, सुबह से ही हम शोभायात्रा की तैयारी में जुटे हुए थे। हम दोपहर दो बजे से यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि हम हिंदू भाइयों का दिल से इस्तकबाल करें। वार्ड 41 के पार्षद आरिफ खान ने कहा कि हसनपुरा में सभी धर्मों के लोग भाईचारे से रहते हैं।

शोभायात्रा में राम दरबार, राधा-कृष्ण, भारत माता, रानी लक्ष्मीबाई, पंच प्यारे, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज की झांकियां शामिल थीं। गाजे-बाजे के साथ बजरंग अखाड़े ने पारंपरिक शस्त्रकला का प्रदर्शन किया, वहीं बच्चों ने लाठियों और तलवारों से हैरतअंगेज करबत दिखाए।

शोभायात्रा पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की गयी। यात्रा हरिपुरा, एनबीसी चौक, सोडाला चौक होते हुए श्याम नगर हरिहर मंदिर पहुंची, जहां भव्य महाआरती हुई। मार्ग में हिंदू समुदाय ने भी फूल, फल और प्रसाद से स्वागत किया।

यात्रा संयोजक मोहित मेहरा ने बताया कि यह दसवीं वार्षिक यात्रा है। यह आयोजन भगवान राम की भक्ति, हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का उत्सव बन गया है।

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