

जयपुर : राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सोमवार को राज्य में पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराने का रास्ता साफ कर दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) राजनीतिक आरक्षण आयोग की रिपोर्ट आने के बाद चुनाव कराने की राज्य सरकार की दलील को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने निर्देश दिया कि आयोग अपनी सिफारिशें दे या नहीं, इसके बावजूद 13 अगस्त तक स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा कर चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाए। राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के समक्ष चुनाव की विस्तृत रुपरेखा प्रस्तुत की।
अदालत के निर्देशों के बाद सरकार ने चुनाव कराने की समय-सीमा से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम दाखिल किया। सरकार की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया अगस्त में शुरू की जाएगी।
सरकार ने सुझाव दिया कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने के बाद आरक्षण के लिए लॉटरी (ड्रा) निकाली जाएगी और उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग 90 दिनों के भीतर पहले नगर निकायों और उसके बाद पंचायतों के चुनाव कराएगा।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के इस प्रस्तावित कार्यक्रम को अस्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आए या नहीं, 13 अगस्त तक चुनाव की घोषणा कर दी जाए।
अदालत ने कहा कि पंचायत और नगर निकायों के लिए मतदान अगस्त के अंतिम सप्ताह से विभिन्न चरणों में शुरू किया जा सकता है तथा पूरी चुनाव प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी कर ली जाए।
यह आदेश पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। लोढ़ा ने कहा, हम पिछले कई महीनों से इस मामले को लेकर अदालत में लड़ाई लड़ रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर मामले में अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। चुनाव एक नियमित प्रक्रिया है और इसे समय पर कराया जाना चाहिए था।