

जयपुर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मितव्ययिता उपाय अपनाने की अपील से जयपुर के सर्राफा बाजार में चिंता का माहौल बन गया है। व्यापारियों को आशंका है कि इससे सोने के आभूषणों की मांग घट सकती है।
मोदी ने पश्चिम एशिया में तनाव के मद्देनजर लोगों को पश्चिम एशिया संकट के प्रतिकूल प्रभाव से बचाने की कोशिश कर रही है। ईंधन का विवेकपूर्ण इस्तेमाल, सोने की खरीद टालने तथा विदेश यात्राओं को स्थगित करने जैसे कदम उठाने की जरूरत है ताकि अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके।
आभूषण व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि मांग में गिरावट का असर आभूषण कारखानों और शोरूम में काम करने वाले कारीगरों व श्रमिकों की आजीविका पर पड़ सकता है। उद्योग प्रतिनिधियों ने आगाह किया कि सोने की मांग में कमी से रोजगार, निर्यात और छोटे कारोबार प्रभावित हो सकते हैं।
आभूषण कारोबारियों व्यापारियों के अनुसार, भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात उद्योग वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 27.7 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला क्षेत्र रहा है। ऐसे में मांग में अचानक गिरावट आने पर इसका सीधा असर रोजगार, निर्यात और लघु उद्योगों पर पड़ सकता है।
जयपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव अजय काला ने कहा, जयपुर देश के प्रमुख रत्न एवं आभूषण केंद्रों में से एक है। यह क्षेत्र रोजगार, हस्तशिल्प, निर्यात, पर्यटन और सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से लाखों परिवारों का सहारा है। मांग में गिरावट उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में सालाना लगभग 42 से 45 टन सोने की खपत होती है जिसका बड़ा हिस्सा विवाह, पारंपरिक आभूषणों और जवाहरात निर्माण में इस्तेमाल होता है। काला ने बताया कि जयपुर का जवाहरात उद्योग लाखों कारीगरों, डिजाइनर, पॉलिश करने वालों, छोटे व्यापारियों और निर्यातकों को रोजगार देता है।
उन्होंने कहा, डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से सोने का आयात लगातार महंगा हो रहा है, जिससे निर्माण लागत बढ़ रही है। पहले से ही ऊंचे आयात शुल्क और जीएसटी के कारण सोना महंगा है। यदि मांग और कमजोर हुई तो इसका असर पूरे व्यापार चक्र पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जयपुर न केवल रत्नों का प्रमुख केंद्र है बल्कि सोने, हीरे और जड़े हुए आभूषणों का बड़ा निर्यातक भी है। सोने के आयात में कमी से तैयार आभूषणों के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है और विदेशी मुद्रा आय प्रभावित हो सकती है।
काला ने सुझाव दिया कि सरकार को राष्ट्रीय आर्थिक हितों एवं उद्योग की चिंताओं के बीच संतुलन बनाना चाहिए। उपभोग-आधारित आयात और निर्यात-उन्मुख आयात में अंतर किया जाना चाहिए, सोने के पुनर्चक्रण और आदान-प्रदान योजनाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए तथा निर्यात-उन्मुख आभूषण निर्माण को नीति समर्थन मिलना चाहिए। साथ ही, आयात शुल्क और कर ढांचे में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।
व्यापारियों के अनुसार, जयपुर के रत्न और आभूषण उद्योग से सीधे और परोक्ष रूप से दो लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक बाजार में सुस्ती रहने पर छोटे कारीगर एवं मजदूर सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
जयपुर सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मित्तल ने कहा कि यदि सरकार उपभोक्ताओं द्वारा बाजार में लाए गए पुनर्चक्रित सोने पर कर राहत देती है, तो घरेलू उपलब्धता बढ़ सकती है और आयात पर निर्भरता घट सकती है।
ज्वेलर्स एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष राजू मंगोड़ीवाला ने कहा कि बेटियों को विवाह में सोना उपहार में देना भारत की पुरानी परंपरा है। हर आय वर्ग के लोग अपनी क्षमता के अनुसार सोना खरीदते हैं।
उन्होंने कहा कि जयपुर के जवाहरात कारखानों में करीब दो लाख लोग काम करते हैं। मांग में गिरावट से कारीगरों की आजीविका पर संकट आ सकता है। उन्होंने आगाह किया कि सोने के आयात पर अत्यधिक सख्ती करने से तस्करी बढ़ने की आशंका है।