अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस : समय पर पहचान से 80% बच्चों की बचाई जा सकती है जान

सिर्फ बड़ों को ही नहीं, बच्चों को भी हो सकता है कैंसर
सांकेतिक तस्वीर
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जयपुर : अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर पर रविवार को चिकित्सकों के एक समूह ने इस बात पर जोर दिया कि समय पर निदान और उचित उपचार के माध्यम से कैंसर से प्रभावित 80 प्रतिशत से अधिक बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

भगवान महावीर कैंसर अस्पताल में बाल कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी माथुर ने कहा कि बच्चों में कैंसर के मामले वयस्कों के कैंसर से भिन्न होते हैं और अक्सर तेजी से बढ़ते हैं, जिसके लिए विशेष उपचार की जरूरत होती है। हालांकि, बच्चों में इससे उबरने की दर अधिक होती है।

उन्होंने बताया कि बच्चों में कैंसर के सबसे आम प्रकारों में ब्लड कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, किडनी कैंसर और हड्डियों का कैंसर शामिल हैं।

भगवान महावीर कैंसर चिकित्सालय के रक्त कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि ‘नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम’ के अनुसार, भारत में कैंसर के कुल मामलों में से लगभग चार प्रतिशत मामले 0-14 वर्ष की आयु के बच्चों में होते हैं और हर साल लगभग 50,000 नए मामले सामने आते हैं। इन मामलों में ब्लड कैंसर की हिस्सेदारी 25-30 प्रतिशत है।

उन्होंने उल्लेख किया कि बीमारी का शुरुआत में पता लगने से इससे उबरने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

चिकित्सकों के अनुसार, सामान्य चेतावनी संकेतों में लगातार बुखार, वजन में असामान्य कमी, लंबे समय तक थकान, हड्डियों या जोड़ों में दर्द, बार-बार संक्रमण और असामान्य सूजन शामिल हैं।

उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें।

डॉ. शर्मा ने रेखांकित किया कि अस्पताल बच्चों को मुफ्त इलाज प्रदान करने के लिए दो परियोजनाएं चला रहा है। 'जीवनदान' परियोजना के तहत 2014 से अब तक 10.73 करोड़ रुपये की लागत से 286 बच्चों का इलाज किया गया है, जिनमें से 178 को बच्चों को कैंसर मुक्त घोषित किया गया है।

उन्होंने बताया कि 'विल्म्स ट्यूमर वेलफेयर इनिशिएटिव' के तहत 2016 से 21 बच्चों का इलाज किया गया है और वे सभी स्वस्थ हो चुके हैं।

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