

जयपुर : राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को शनिवार को आश्चर्यजनक व अनावश्यक बताया जिसमें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ कथित दोहरी नागरिकता मामले में प्राथमिकी दर्ज करने को कहा गया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गहलोत ने कहा, इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ ब्रिटिश नागरिकता के बेबुनियाद आरोपों पर प्राथमिकी के आदेश देना आश्चर्यजनक एवं न्यायपालिका द्वारा कार्यपालिका पर अनावश्यक बोझ डालने जैसा है।
गहलोत ने कहा, पूर्व में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जुलाई 2025 एवं सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश द्वारा 2019 में ऐसी याचिकाओं को खारिज किया जा चुका है। इसके बावजूद अब जांच का आदेश देना समझ से परे है।
उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ शुक्रवार को दोहरी नागरिकता के कथित विवाद के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (प्राथमिकी) दर्ज होने के बाद राज्य सरकार किसी भी केंद्रीय एजेंसी को मामले की जांच करने का निर्देश दे सकती है।
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने कर्नाटक के BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर यह आदेश पारित किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपों के प्रथम दृष्टया अवलोकन से संज्ञेय अपराध बनता है, इसलिए मामले की जांच आवश्यक है।
यह अर्जी शुरू में रायबरेली की विशेष सांसद/विधायक अदालत में दायर की गई थी लेकिन शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने 17 दिसंबर, 2025 को उक्त आपराधिक शिकायत मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था। लखनऊ की MP/MLA कोर्ट ने 28 जनवरी, 2026 को उक्त याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में अपील की थी।
एक बयान में गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी और दादी इंदिरा गांधी ने इस देश को एक और अखंड रखने के लिए शहादत दी है।
उन्होंने कहा, उनके परनाना (जवाहरलाल नेहरू) ने 10 साल अंग्रेजों से लड़ते हुए जेलों में बिताए और अपनी पूरी संपत्ति अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में दान कर दी। स्वयं राहुल गांधी ने देश में बढ़ते तनाव को खत्म करने एवं प्यार, मोहब्बत और भाईचारा कायम करने के लिए पूरे भारत में पदयात्रा की। ऐसे शख्स के खिलाफ इस तरह की कार्यवाही बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
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