

जयपुर : राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और सीमांकन संबंधी रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति का स्वागत किया है। उम्मीद जताई कि समिति के प्रयासों से छोटी पहाड़ियों का संरक्षण सुनिश्चित होगा व अरावली का प्राकृतिक सुरक्षा कवच मजबूत बना रहेगा।
गहलोत ने कहा, अरावली की परिभाषा और संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन स्वागतयोग्य कदम है। हमें उम्मीद है कि यह समिति अरावली के पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को सुरक्षित रखने वाली एक वैज्ञानिक परिभाषा तैयार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की रिपोर्ट में मौजूद मुद्दों और महत्वपूर्ण अस्पष्टताओं की समीक्षा के लिए इस समिति का गठन किया है। अदालत ने समिति को उन बिंदुओं की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया है, जिन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
गहलोत ने कहा कि राजस्थान और देश जिस तरह भीषण गर्मी तथा मौसम संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उसे देखते हुए अरावली का संरक्षण व आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एक-दो दशक पहले तय किए गए मानदंड आज की बदलती और गंभीर जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हो सकते, ऐसे में समिति को वर्तमान पर्यावरणीय संकट को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, केंद्र की नीतियों ने अरावली के अस्तित्व के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया था। इसके बाद ‘अरावली बचाओ’ अभियान को बल मिला। मुझे पूरा विश्वास है कि समिति के प्रयासों से हमारी लघु पहाड़ियों का संरक्षण होगा और अरावली का यह प्राकृतिक सुरक्षा कवच मजबूत बना रहेगा।