

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य में जारी SIR प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका पर तीखी नाराज़गी जताई है। रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे चार पन्नों के कड़े पत्र (इस क्रम में तीसरा पत्र) में मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अपर्याप्त योजना, मनमाने और खामख्याली फैसलों के कारण पूरी प्रक्रिया अब 'प्रहसन' में बदल गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तुरंत सुधार नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं का नाम सूची से कट सकता है, जो लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा आघात होगा।
व्हाट्सऐप या टेक्स्ट मैसेज के जरिए निर्देश
ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाया कि इतनी संवेदनशील संवैधानिक प्रक्रिया में कोई औपचारिक सरकारी अधिसूचना जारी नहीं की जा रही और जिलास्तरीय अधिकारियों को व्हाट्सऐप या टेक्स्ट मैसेज के जरिए निर्देश भेजे जा रहे हैं, जो पारदर्शिता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इसी अनौपचारिक व्यवस्था के आधार पर बिहार में मान्य ‘फैमिली रजिस्टर’ और राज्य सरकार के स्थायी निवास प्रमाणपत्र तक को अचानक अमान्य कर दिया गया है। साथ ही, बाहर काम करने गए प्रवासी श्रमिकों को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में उपस्थित होने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसे उन्होंने अमानवीय बताया।
‘बैक-एंड’ से मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं
पत्र में आईटी सिस्टम को भी अस्थिर बताते हुए मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि ‘बैक-एंड’ से मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जिसकी जानकारी कई बार इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को भी नहीं होती। सुनवाई प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने कहा कि बिना कारण बताए लोगों को बुलाया जा रहा है, बुजुर्गों और बीमारों तक को 20–25 किलोमीटर दूर आने को मजबूर किया जा रहा है, और दस्तावेज जमा कराने के बावजूद कोई रसीद नहीं दी जा रही।
BLA को सुनवाई के दौरान मौजूद रहने से रोक
मुख्यमंत्री ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार की सिफारिशों की अनदेखी कर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है, जिनमें अधिकतर केंद्र सरकार के ग्रुप-बी कर्मचारी हैं, जिन्हें इस संवेदनशील काम का अनुभव नहीं है। साथ ही, बूथ लेवल एजेंटों को सुनवाई के दौरान मौजूद रहने से रोके जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। अंत में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से तुरंत इन सभी खामियों को दूर करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यह अव्यवस्थित और एड-हॉक प्रक्रिया जारी रही, तो यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों पर कुठाराघात करेगी।