

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की नयी भाजपा सरकार ने सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर पूर्ववर्ती शासनकाल की कार्यप्रणाली की व्यापक जांच शुरू कर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को दो उच्चस्तरीय जांच आयोगों के गठन की घोषणा करते हुए साफ संकेत दिया कि 2021 के बाद राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा, महिलाओं पर अत्याचार और कथित संस्थागत भ्रष्टाचार को लेकर उनकी सरकार आक्रामक रुख अपनाने जा रही है।
पहला आयोग महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ कथित अत्याचार के मामलों की जांच करेगा। इसकी अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश समाप्ति चटर्जी करेंगी, जबकि 2012 के चर्चित पार्क स्ट्रीट दुष्कर्म मामले की जांच के लिए जानी जाने वाली पूर्व आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन इसमें सदस्य होंगी। दूसरा आयोग पूर्व न्यायाधीश विश्वजीत बसु की अध्यक्षता में गठित आयोग सरकारी योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं, ‘कट मनी’ नेटवर्क और प्रशासनिक भ्रष्टाचार की जांच करेगा। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के. जयरामन भी इस पैनल का हिस्सा होंगे।
राजनीतिक रूप से यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जांच का दायरा सीधे 2021 के बाद के उस दौर को निशाना बना रहा है, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी थी। भाजपा लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि चुनाव बाद हिंसा, महिला उत्पीड़न और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को उस समय राजनीतिक संरक्षण मिला था। अब सत्ता में आने के बाद भाजपा इन्हीं आरोपों को संस्थागत जांच के जरिए राजनीतिक और कानूनी आधार देने की कोशिश कर रही है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2021 के चुनाव बाद हिंसा से जुड़े मामलों की दोबारा समीक्षा होगी। जिन मामलों में पुलिस जांच में लापरवाही या राजनीतिक दबाव के आरोप हैं, उन्हें फिर से खोला जाएगा। फाइनल रिपोर्ट जमा हो चुके मामलों की भी कानूनी समीक्षा की जाएगी। इससे स्पष्ट है कि नयी सरकार केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह पूर्व शासनकाल की जवाबदेही तय करने की राजनीतिक रणनीति पर भी काम कर रही है।