बंगाल में टूटी परंपरा, पहली बार विधायक बने रथिंद्र बोस बने विधानसभा स्पीकर

सीएम Suvendu Adhikari का बड़ा दांव, उत्तर बंगाल में पकड़ मजबूत करने की रणनीति
बंगाल में टूटी परंपरा, पहली बार विधायक बने रथिंद्र बोस बने विधानसभा स्पीकर
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा और अलग फैसला लिया है। आमतौर पर विधानसभा स्पीकर का पद अनुभवी नेताओं को दिया जाता है, लेकिन इस बार परंपरा से हटकर पहली बार विधायक बने Rathindra Bose को इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया।

मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने कूच बिहार दक्षिण सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे रथिंद्र बोस के नाम को 18वीं बंगाल विधानसभा के स्पीकर पद के लिए प्रस्तावित किया था।

इस फैसले को सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। खासकर कूच बिहार और पूरे उत्तर बंगाल में पार्टी की पकड़ मजबूत करने के प्रयास के रूप में इसे अहम माना जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार इस क्षेत्र के किसी विधायक को स्पीकर पद के लिए नामित किया गया है।

65 वर्षीय रथिंद्र बोस पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और लंबे समय से संगठनात्मक काम में सक्रिय रहे हैं। वे बीजेपी के राज्य उपाध्यक्ष और महासचिव जैसे अहम पदों पर भी काम कर चुके हैं और फिलहाल सिलीगुड़ी संगठनात्मक क्षेत्र के संयोजक हैं।

बताया जा रहा है कि बोस का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी पुराना जुड़ाव रहा है और उन्होंने लंबे समय तक संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। उनके नाम की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बोस एक समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने कभी किसी पद की इच्छा नहीं जताई।

मुख्यमंत्री के अनुसार, स्पीकर पद के लिए राजनीतिक समझ और मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि दोनों जरूरी होती हैं, और रथिंद्र बोस इन दोनों कसौटियों पर खरे उतरते हैं।

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