

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था की बंगाल शाखा का भव्य वार्षिकोत्सव गत शुक्रवार को कोलकता के हिंदुस्तान क्लब के प्रांगण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आरम्भ गणेश वंदना से हुआ। दीप प्रज्जवलन के पश्चात बंगाल शाखा की अध्यक्ष मंजुश्री गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य अतिथि थे प्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित श्रीकांत शर्मा “ बालव्यास” जी , संस्था की संस्थापक अध्यक्ष डॉ इंदु झुनझुनवाला (बेंगलुरू) एवं अध्यक्ष डॉ प्रेम तन्मय (बेंगलुरू), विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे प्रख्यात साहित्यकार आलोचक और भारतीय भाषा परिषद के निर्देशक डॉ शम्भूनाथ, प्रसिद्ध सहित्यकार डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी, कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राजश्री शुक्ला, बेंगलुरू से पधारे श्री अनिल मोघे जी, नैना मोर ,एवं बनारस से पधारे राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित श्री अष्टभुजा मिश्रा जी एवम् मैसूर की सुप्रसिध्द कवयित्री कृष्णामनिश्री।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में शाखा कोषाध्यक्ष मीना अग्रवाल ने सुंदर संचालन से कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। तेजस्विता सम्मान से विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु 15 महिलाओं को सम्मानित किया गया। इनमें शिक्षा सेवी सम्मान-डॉ राजश्री शुक्ला, संयुक्ता झंझारिया-चिकित्सा सेवा सम्मान, लावण्या गोयनका-युवा उद्यमी सम्मान, शुभ्रा अग्रवाल- नाट्य रत्न सम्मान, मौली मुखर्जी- शास्त्रीय नृत्य पर्यवेक्षक, रेखा शर्मा- विशिष्ट सेवा सम्मान, कविता चौधरी- वाकाथोन रत्न सम्मान, नीना गुप्ता- खेल रत्न सम्मान, कृष्णा मणिश्री- साहित्यसेवी सम्मान, असीमा बाइन, भारती बर, सरस्वती सरदार, प्रभावती मंडल को सामाजिक सेवा हेतु प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त उत्कृष्ट सामाजिक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्य हेतु चार संस्थाओं- रचनाकार मंच के संस्थापक अध्यक्ष सुरेश चौधरी, मारवाड़ी संस्कृति मंच के संस्थापक अध्यक्ष ललित प्रहलादका, कोलकाता मारवाड़ी महिला समिति की अध्यक्ष सरोज गर्ग, लायंस क्लब प्रेरणा की अध्यक्ष पूनम गोयल को सम्मानित किया गया। संस्था के पदाधिकारियों द्वारा बंगाल शाखा अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, सह सचिव शशि लाहोटी एवम् उपाध्यक्ष डॉ उषा पाण्डेय का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकों का लोकार्पण हुआ वे थी- डॉ इंदु झुनझुनवाला रचित आज की अहिल्या, संस्था की महासचिव चन्दा प्रहलादका रचित दोहे सतसई, सविता भुवानिया रचित खिलते कुसुम, और संस्था के संरक्षक एवम् रचनाकार के प्रमुख सुरेश चौधरी की लघु उपनिषद त्रयी, ऋग्वेदीय उपनिषद, यजुर्वेदीय उपनिषद, अथर्ववेदीय उपनिषद तथा चण्डीगढ के जसवीर चावला की जसवीरिया।
भोजनावकाश के बाद दूसरा सत्र आरम्भ हुआ, जिसमें सत्र के संचालन के साथ काव्य गोष्ठी का संचालन भी संस्था अध्यक्ष डॉ.इन्दु ने किया, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। मौली मुखर्जी के कत्थक नृत्य ने लोगों का मन मोह लिया, वहीं अष्टभुजा मिश्रा जी के नौटंकी स्टाइल होली गायन ने समा बांध दिया, एक संक्षिप्त काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें रचना सरन, आलोक चौधरी, अंजू मनोत ने भी भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत मे सभी सदस्यों द्वारा मनमोहक कव्वाली का मंचन किया, जिसपर सभी झूम उठे। 'ए आई' के ऊपर सविता भुवानिया द्वारा द्वारा रचित 'बुद्धि का डिजिटल उपवास' एकांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें मुख्य भूमिका में प्रीति साह एवम् कविता गुप्ता रहीं। पूनम जायसवाल ने कैकयी पर एक मोनो लोग प्रस्तुत करके सबका समकक्ष चिन्तन का एक नव आयाम रखा। मैसूर से पधारी कृष्णामनिश्री ने एक भावनात्मक नृत्य प्रस्तुत करके सबका मन मोह लिया।