शेख शाहजहां व आलमगीर की जमानत याचिका खारिज

बहुत प्रभावशाली हैं, असर पड़ सकता है जांच पर : जज
शेख शाहजहां व आलमगीर की जमानत याचिका खारिज
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : हाई कोर्ट की जस्टिस शुभ्रा घोष ने शेख शाहजहां और आलमगीर की जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस घोष ने मामले की सुनवायी के बाद फैसले को आरक्षित कर लिया था। जस्टिस घोष ने अपने फैसले में कहा है कि दोनों ही अभियुक्त काफी प्रभावशाली है, लोग उनसे खौफ खाते हैं। अगर ऐसे में जमानत दी जाती है तो इसका असर जांच पर पड़ सकता है।

राशन घोटाले के मामले की जांच कर रहे ईडी के अफसर जब शाहजहां के मकान पर गए थे तो उन पर हमला किया गया था। जस्टिस घोष ने शाहजहां की उस दलील को खारिज कर दी है कि वह घर पर नहीं था, उसके मोबाइल फोन वहां पड़े हुए थे। उन्होंने माना है कि शाहजहां ने घटना के दिन सुबह सात से नौ बजे के बीच भीड़ को घर पर बुलाया था और उन्हें ईडी के अफसरों और सीआरपीएफ के जवानों पर हमला करने के लिए उकसाया था। आलमगीर शेख शाहजहां का भाई है और तथ्यों के मुताबिक वह भी इस अपराध से जुड़ा हुआ था। जस्टिस घोष ने कहा है कि माना ये अभियुक्त काफी दिनों से हिरासत में हैं।

ट्रायल शुरू नहीं हो रहा है। हिरासत सजा में नहीं बदल जानी चाहिए। जस्टिस घोष ने कहा है कि जमानत याचिका पर विचार करते समय मामले के तथ्यों पर गौर करना पड़ता है। उनके खिलाफ काफी सुबूत हैं, गवाहों के बयान हैं और लोगों में उनकी दहशत है। अगर ऐसे में उन्हें जमानत पर रिहा किया जाता है तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और सुबूत के साथ भी छेड़छाड़ कर सकते हैं। इस स्थिति में उन्हें जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता है। लोकल कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर विचार के दौरान जज की टिप्पणी को एक नजीर नहीं माना जाए। लोकल कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद हाई कोर्ट में अपील की गई थी।

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