

कोलकाता : धर्मतल्ला में नीट आंदोलन के दौरान पत्रकारों पर हुए कथित हमले की गूंज अब विधानसभा तक पहुंच गई है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कड़े रुख का खुलकर समर्थन करते हुए हमलावरों के खिलाफ ''गुंडा दमन कानून'' के तहत कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने एसएफआई नेतृत्व पर आंदोलन की आड़ में हिंसा को बढ़ावा देने और बाद में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप लगाया।
ऋतब्रत ने कहा कि उन्होंने पीड़ित पत्रकारों से बात की है और मोबाइल में मौजूद वीडियो फुटेज ही हमलावरों की पहचान के लिए पर्याप्त है। उनका आरोप था कि प्रदर्शन में इस्तेमाल किए गए झंडों के डंडे पहले से ही मारपीट के इरादे से लाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने और लूटपाट की कोशिश की गई।
एसएफआई नेतृत्व पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन का श्रेय लेने वाले नेता हिंसा होने पर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं। उनका आरोप था कि पत्रकारों पर हमला हो रहा था, लेकिन छात्र संगठन के शीर्ष नेता वहां से चले गए। उन्होंने शमीक लाहिड़ी पर भी कटाक्ष किया।
नेता प्रतिपक्ष ने ''सेवाश्रय'' शिविर की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह भी जांच होनी चाहिए कि कहीं इसके जरिए काले धन को सफेद करने की कोशिश तो नहीं की गई। उन्होंने इस संबंध में जांच एजेंसी को लिखित शिकायत देने की बात भी कही।
विधानसभा में कुणाल घोष को पर्याप्त समय नहीं मिलने के विवाद पर तंज कसते हुए ऋतब्रत ने कहा कि सदन में कई विधायक एक ही बात को अलग-अलग तरीके से दोहरा रहे हैं।