मानसून में बढ़ा बुखार का खतरा, कोलकाता ‘हाई रिस्क’ शहरों में शामिल

209 में से 186 शहरों में सीजन की शुरुआत के मुकाबले बढ़ा जोखिम
सांकेतिक चित्र
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मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : मानसून के साथ देशभर में बुखार का खतरा बढ़ता जा रहा है और कोलकाता भी अब ‘हाई रिस्क’ शहरों की सूची में शामिल है। फार्मईजी के ‘फीवर वॉच’ के अनुसार 25 अगस्त को कोलकाता का कुल मानसूनी बुखार जोखिम स्कोर 77/100 रहा। इसके साथ कोलकाता देश के 209 ट्रैक किए जा रहे शहरों में शीर्ष जोखिम वाले शहरों में शामिल रहा।

लाइव आंकड़ों में कोलकाता का जोखिम मुंबई (76), सूरत (75), बोकारो (73), कानपुर (72), अमृतसर (71) और जमशेदपुर (70) से अधिक दर्ज किया गया। वहीं रांची का 68 और लखनऊ और चेन्नई का जोखिम क्रमशः 65 रहा। इसके मुकाबले बेंगलुरु का जोखिम केवल 41 रहा, जो ‘लो-मॉडरेट’ श्रेणी में है।

186 शहरों में बढ़ा जोखिम

फीवर वॉच के अनुसार मानसून की शुरुआत में कम बारिश के बाद राष्ट्रीय बुखार जोखिम स्कोर पहले सप्ताह के 47 से बढ़कर 12 अगस्त तक 61 हो गया। इस दौरान ‘हाई रिस्क’ वाले शहरों की संख्या जुलाई के मध्य के एक से बढ़कर 10 हो गई। कुल 209 शहरों में से 186 शहरों में सीजन की शुरुआत की तुलना में बुखार का जोखिम अधिक दर्ज किया गया।

बारिश और मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियों में भी बड़ा बदलाव आया है। राष्ट्रीय मौसम एवं मच्छर प्रजनन संकेतक 48 से बढ़कर 87 हो गया, जबकि पिछले 14 दिनों की राष्ट्रीय बारिश करीब 35 मिमी से बढ़कर लगभग 133 मिमी हो गई।

सिर्फ डेंगू नहीं, टाइफाइड भी बड़ी चिंता

फीवर वॉच के आंकड़ों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मानसून के बुखार को केवल डेंगू या अन्य मच्छरजनित बीमारियों तक सीमित नहीं किया जा सकता। चार बीमारियों में टाइफाइड की टेस्ट-पॉजिटिविटी दर सबसे अधिक 25.5 प्रतिशत दर्ज की गई। यानी करीब हर चार टेस्ट में से एक टेस्ट पॉजिटिव रहा। इसके मुकाबले डेंगू की पॉजिटिविटी 8.5 प्रतिशत, चिकनगुनिया की 1.8 प्रतिशत और मलेरिया की 1.4 प्रतिशत रही।

मच्छरजनित तीनों बीमारियों के मामलों में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कमी आई है, जबकि टाइफाइड के मामलों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। खास बात यह है कि इस समय ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में शामिल 10 शहरों में से सात में टाइफाइड के मामले अधिक पाए गए हैं।

दूषित पानी और भोजन से भी रहें सावधान

टाइफाइड मच्छरों से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन से फैलता है। इसलिए मानसून में कोलकाता समेत उन शहरों में जहां बुखार का जोखिम बढ़ा है, साफ पानी पीना, खुले या अस्वच्छ भोजन से बचना और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है। टाइफाइड की कुछ जांचों में गलत पॉजिटिव परिणाम की संभावना भी रहती है, इसलिए लगातार बुखार रहने पर डॉक्टर की सलाह से उचित जांच और उपचार कराना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त से मानसून के बाद के महीनों तक बुखार का जोखिम सामान्यतः अधिक रहता है। ऐसे में कोलकाता में बारिश, जलजमाव और मच्छरों के प्रजनन की स्थिति को देखते हुए लोगों को बुखार को केवल वायरल या डेंगू मानकर नजरअंदाज करने के बजाय जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

कोलकाता की तुलना में अन्य शहर

25 अगस्त के फीवर वॉच स्कोर के अनुसार—

कोलकाता : 77 — हाई रिस्क

मुंबई : 76 — हाई रिस्क

सूरत : 75 — हाई रिस्क

बोकारो : 73 — हाई रिस्क

कानपुर : 72 — हाई रिस्क

अमृतसर : 71 — हाई रिस्क

जमशेदपुर : 70 — हाई रिस्क

रांची : 68 — मॉडरेट

लखनऊ : 65 — मॉडरेट

चेन्नई : 65 — मॉडरेट

बेंगलुरु : 41 — लो-मॉडरेट

इस तुलना में कोलकाता का जोखिम मुंबई और सूरत जैसे महानगरों से भी थोड़ा अधिक है, जबकि बेंगलुरु की स्थिति फिलहाल काफी बेहतर है।

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