'रामधनु' लौटेगा, तुष्टीकरण हटेगा : उच्च शिक्षा मंत्री

पाठ्यपुस्तकों से बदले जाएंगे विवादित शब्द
जगन्नाथ चट्टोपाध्याय
जगन्नाथ चट्टोपाध्याय
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प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में शिक्षा व्यवस्था में भी तुष्टीकरण की राजनीति की गई। उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में कई शब्दों को सुनियोजित तरीके से बदला गया, जैसे ‘रामधनु’ की जगह ‘रंगधनु’ (इन्द्र धनुष), ‘काका’ की जगह ‘चाचा’ और ‘जलखाबार’ की जगह ‘नाश्ता’ जैसे शब्दों का प्रयोग बढ़ाया गया।

उनका दावा है कि भाजपा सरकार शिक्षा को राजनीति और तुष्टीकरण से मुक्त करने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव की दिशा में काम कर रही है। मंत्री ने कहा कि नई सिलेबस समिति को ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए, जो राज्य की संस्कृति व परंपरा को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि सिलेबस को ‘आसमान’ से ‘आकाश’ की ओर वापस ले जाना होगा।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार के दौरान प्राथमिक स्तर पर ‘वर्ण परिचय’ और ‘सहज पाठ’ जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों को हटाकर ‘आमार बोई, आमार पर्यावरण’ जैसी पुस्तकों के माध्यम से विशेष उद्देश्य साधने की कोशिश की गई। मंत्री ने संकेत दिया कि भविष्य में पारंपरिक पुस्तकों और मूल शिक्षण पद्धति को फिर से लागू किया जाएगा।

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