

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : तिलजला में एक चमड़ा कारखाने में हाल ही में लगी आग, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और फैक्ट्री निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद पश्चिम बंगाल में उच्च जोखिम वाले उद्योगों के लिए सख्त अनुपालन प्रणाली लागू करने की मांग तेज हो गई है।
इसी मुद्दे को लेकर प्रोग्रेसिव इनोवेटर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुबीर राय चौधरी ने राज्य सरकार से सभी औद्योगिक इकाइयों के लिए सेडेक्स फोर पिलर ऑडिट को अनिवार्य बनाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में अधिकांश उद्योगों में अनुपालन व्यवस्था केवल दस्तावेजों और समय-समय पर होने वाले निरीक्षणों तक सीमित है, जिससे फैक्ट्रियों की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती। उनके अनुसार, यदि प्रत्येक फैक्ट्री के लिए सेडेक्स ऑडिट और उसकी रिपोर्ट सीधे सरकारी विभागों को जमा करना अनिवार्य किया जाए, तो औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकती है।
सुबीर राय चौधरी ने कहा कि इस प्रकार की ऑडिट रिपोर्ट से कार्यस्थल सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, श्रम कानून अनुपालन, पर्यावरण प्रबंधन और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।
उन्होंने कहा, “सेडेक्स रिपोर्ट केवल औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं हैं, बल्कि यह गहन परिचालन ऑडिट हैं, जो फैक्ट्री स्तर पर मौजूद वास्तविक कमियों को उजागर करते हैं। यदि सरकार इन्हें नियामकीय ढांचे का हिस्सा बनाती है, तो उद्योगों के लिए एक मजबूत रियल-टाइम अनुपालन निगरानी प्रणाली विकसित की जा सकती है।”
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले आठ वर्षों में उनकी संस्था ने SA8000, सेडेक्स और BSCI जैसे सामाजिक अनुपालन मानकों को अपनाकर कार्यस्थल सुरक्षा, फायर ड्रिल और कर्मचारियों के प्रशिक्षण को मजबूत किया है। उनके अनुसार, टॉपसिया-तिलजला लेदर क्लस्टर का हिस्सा होने के नाते उनकी संस्था नियमित रूप से अग्नि सुरक्षा अभ्यास, श्रमिक प्रशिक्षण और लाइसेंस अपडेट की प्रक्रिया का पालन करती है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सेडेक्स आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने से सरकार दुर्घटनाओं से पहले उच्च जोखिम वाली फैक्ट्रियों की पहचान कर सकेगी और बिना अतिरिक्त निरीक्षण बोझ बढ़ाए निगरानी को अधिक प्रभावी बना सकेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यवस्था न केवल श्रमिक सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि राज्य की निर्यात प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देगी।