

कोलकाता : दक्षिण कोलकाता के प्रमुख हरित क्षेत्र रवींद्र सरोवर को पर्यटन की दृष्टि से और आकर्षक बनाने के लिए नई योजनाओं पर काम शुरू हो गया है।
शहरी विकास एवं नगर प्रशासन विभाग के निर्देश के बाद कोलकाता महानगर विकास प्राधिकरण (KMDA) ने सरोवर में प्रवेश शुल्क लागू करने, गाइडेड टूर शुरू करने और वर्षों पहले बंद हो चुकी पैडल बोटिंग सेवा को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
10 रुपये प्रवेश शुल्क, मॉर्निंग वॉकरों को मिलेगा मुफ्त पास
प्रस्ताव के अनुसार, रवींद्र सरोवर में आने वाले पर्यटकों से 10 रुपये का प्रवेश शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, नियमित रूप से सुबह की सैर करने आने वाले लोगों के लिए निःशुल्क पास जारी करने की योजना है, ताकि स्थानीय मॉर्निंग वॉकरों को किसी तरह की असुविधा न हो।
अधिकारियों का मानना है कि इससे सरोवर के रखरखाव के लिए अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
गाइडेड टूर और पैडल बोटिंग से बढ़ेगा आकर्षण
योजना के तहत गाइडेड टूर भी शुरू किए जाएंगे, जिनके माध्यम से यहाँ आने वाले लोगों को रवींद्र सरोवर के इतिहास, जैव विविधता, दुर्लभ वृक्षों, पक्षियों और पर्यावरणीय महत्व की जानकारी दी जाएगी।
इससे इस ऐतिहासिक जलाशय को एक प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, 2009 में बंद हुई पैडल बोटिंग सेवा को दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही है।
अधिकारियों के अनुसार, बोटिंग शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों, लाइफ सेफ्टी उपकरणों और परिचालन व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाएगा।
संग्रहालय और द्वीपों के संरक्षण की भी योजना
सरोवर परिसर में स्थित एक पुराने और जर्जर प्राथमिक विद्यालय भवन का जीर्णोद्धार कर उसे आर्काइव एवं संग्रहालय में बदलने की योजना भी बनाई गई है। यहां रवींद्र सरोवर के निर्माण, विकास और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी तस्वीरें, दस्तावेज और अन्य सामग्री प्रदर्शित की जाएगी।
इसके साथ ही सरोवर के भीतर स्थित तीन द्वीपों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी प्रस्तावित है। इन द्वीपों को कटाव से बचाने, हरियाली बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे।
अधिकारियों का कहना है कि इन सभी योजनाओं का उद्देश्य रवींद्र सरोवर को एक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है, जबकि इसकी प्राकृतिक और पारिस्थितिक विशेषताओं को भी संरक्षित रखा जाएगा।