पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के खिलाफ बढ़ रही ऑनलाइन शिकायतें

चुनाव आयोग को तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है। चुनाव आयोग को अपनी कार्यशैली में सुधार करते हुए मतदाताओं के साथ पारदर्शिता बनाए रखनी होगी ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और सही तरीके से हो सके।
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334 दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द
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कोलकाता : आगामी विधानसभा चुनावों के तहत चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में सुधार की कोशिशों के बावजूद कई समस्याएं सामने आ रही हैं। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन डेटा अपलोड और फॉर्म भरने में भारी गड़बड़ियां देखने को मिल रही हैं, जिससे मतदाताओं और अधिकारियों के बीच चिंता का माहौल बन गया है।

एसआईआर प्रक्रिया में समस्याओं का सिलसिला

विभिन्न क्षेत्रों से मिली रिपोर्ट्स के अनुसार, कई मतदाता एसआईआर फॉर्म को ऑनलाइन जमा करने में असमर्थ हैं। कुछ ने यह भी बताया कि उनका फोन नंबर लिंक नहीं होने के कारण वे फॉर्म को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा, आधार सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी समस्याएं उठ रही हैं।

BLO से मार्गदर्शन की कमी

बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को सही मार्गदर्शन देने में भी कमी देखी जा रही है। चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले कई नागरिकों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि BLO फॉर्म भरने और संबंधित जानकारी देने के लिए घर-घर नहीं जा रहे हैं।

हेल्पलाइन नंबर और टोल-फ्री सेवा की असफलता

चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए हेल्पलाइन नंबर 1950 के कार्य न करने से भी लोग अपनी शिकायतें सही समय पर दर्ज नहीं कर पा रहे हैं। तकनीकी समस्याओं के कारण यह हेल्पलाइन काम नहीं कर रही, जिससे मतदाता अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करने में असमर्थ हैं। कई मतदाता ऑनलाइन शिकायतें दर्ज करने के बावजूद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं पा रहे हैं। कुछ स्थानों पर मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग की कमजोरियों के कारण वोट चोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

लिलुआ में पूर्व पार्षद की पत्नी का नाम 2002 की वोटर लिस्ट से गायब

बाली विधानसभा क्षेत्र के लिलुआ इलाके के नस्करपाड़ा में उस समय हड़कंप मच गया जब क्षेत्र के पूर्व पार्षद देव किशोर पाठक की पत्नी पियाली पाठक भट्टाचार्जी को पता चला कि उनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट से ही गायब हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि पियाली पाठक भट्टाचार्जी और उनकी माँ मंजुला भट्टाचार्जी ने 2002 के बाद हुए कई चुनावों में नियमित रूप से वोट डाला था, लेकिन जब अब नये सिरे से SIR का फार्म भरने के लिए 2002 की वोटर लिस्ट में नाम चेक करने की बारी आयी तो उनका नाम ही गायब मिला। प्रशासन से इस मामले की जांच और तुरंत सुधार की मांग उठने लगी है।

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी: सियालदह के परिवार का SIR फॉर्म अचानक पहुँचा बेहला

सियालदह इलाके के रहने वाले एक परिवार के साथ चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आई है। परिवार ने अपना एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) फॉर्म अपने विधानसभा क्षेत्र चौरंगी के अंतर्गत सियालदह स्थित एक स्कूल में जमा किया था, लेकिन अचानक उन्हें फोन आया कि उनका फॉर्म बेहला विधानसभा क्षेत्र के एक स्कूल में पहुँच गया है। पीड़ित परिवार में बबीता गुप्ता, उनके पति दीपक गुप्ता और दीपक के भाई संतोष गुप्ता शामिल हैं। तीनों ने पिछले दिनों चौरंगी विधानसभा क्षेत्र के सियालदह स्थित बूथ पर अपने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे।

लेकिन कुछ दिन बाद उन्हें चुनाव आयोग की ओर से फोन आया कि उनका आवेदन बेहला क्षेत्र में ट्रांसफर हो गया है। परेशान परिवार ने तुरंत सियालदह के बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) से संपर्क किया। सियालदह के बीएलओ ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि अब आपको बेहला के बीएलओ से बात करनी होगी। जब परिवार ने बेहला के बीएलओ से संपर्क किया तो वहाँ से जवाब मिला कि “हाँ, आपके कागजात हमारे पास आ गए हैं, हम इन्हें वापस सियालदह ट्रांसफर कर देंगे, लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा।” इस पूरे मामले से बबीता गुप्ता, दीपक गुप्ता और संतोष गुप्ता बुरी तरह घबरा गए हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर सुधार नहीं हुआ तो लोकसभा चुनाव में उनका वोट छूट सकता है।

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