पंचायत इलाकों में अब बिना प्लान नहीं बनेंगे बड़े भवन

जल्द आएगा नया बिल्डिंग कानून
पंचायत मंत्री दिलीप घोष
पंचायत मंत्री दिलीप घोष
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दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार पंचायत क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को नियंत्रित करने के लिए जल्द नया कानूनी ढांचा लागू करेगी। शहरी इलाकों के तर्ज पर पंचायत क्षेत्रों में भी बिल्डिंग प्लान की मंजूरी और तय निर्माण नियमों का पालन अनिवार्य किया जाएगा। सरकार ने यह कदम ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ रहे अनियोजित निर्माण और मॉनसून के दौरान जल-जमाव की समस्या को देखते हुए उठाया है। घोष ने कहा कि पंचायत क्षेत्रों में अब तक निर्माण कार्यों को नियंत्रित करने के लिए व्यापक कानूनी व्यवस्था नहीं थी। इसका फायदा उठाकर कई जगह बड़े-बड़े मकान और अपार्टमेंट खड़े कर दिए गए। उन्होंने कहा कि नए कानून के लागू होने के बाद निर्माण कार्यों को निर्धारित नियमों के तहत करना होगा। मंत्री ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जल-जमाव के लिए तालाबों को भरने और जल निकासी के रास्तों में निर्माण के कारण पैदा हुई रुकावट को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘तालाबों और नालियों को बंद कर दिया गया है और पैसे देकर घर बना लिए गए हैं। जिन तालाबों में पानी जमा होता था, वे अब नहीं रहे।’

कई राज्यों के कानूनों का अध्ययन

मंत्री के मुताबिक राज्य सरकार ने पंचायत क्षेत्रों के लिए नया कानून तैयार करने से पहले देश के अलग-अलग राज्यों में लागू निर्माण संबंधी कानूनों का अध्ययन किया है। प्रस्तावित कानून को सरकारी प्रक्रिया के तहत भेजा जा चुका है और यह वित्त विभाग तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा, ‘हमने अलग-अलग राज्यों के कानूनों का अध्ययन किया है और एक कानून तैयार किया है। इसे सिस्टम के जरिए भेजा गया है और यह वित्त विभाग तक पहुंच गया है। हम बहुत जल्द नियम लाएंगे।’

बड़े मकानों और अपार्टमेंट पर भी निगरानी

सरकार का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में तेजी से हो रहे विकास के साथ अब केवल सीमित दिशानिर्देशों के आधार पर निर्माण कार्यों को नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है। पंचायत क्षेत्रों में बड़े मकानों के साथ-साथ बहुमंजिली और अपार्टमेंट इमारतों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में निर्माण की अनुमति, बिल्डिंग प्लान और नियमों के पालन के लिए स्पष्ट व्यवस्था जरूरी हो गई है। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य पंचायत क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण पर लगाम लगाने के साथ तालाबों को भरने, नालियों और जल निकासी के रास्तों पर अतिक्रमण तथा ऐसे निर्माण को रोकना है, जिससे बारिश के दौरान जल-जमाव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। सरकार के नए नियम लागू होने के बाद पंचायत क्षेत्रों में निर्माण करने वालों को शहरी क्षेत्रों की तरह तय मानकों और अनुमति प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है।

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