

रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता
दक्षिण 24 परगना : पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के तहत लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की खबरों के बीच लोगों में भारी चिंता का माहौल है। नाम कैसे वापस आएगा और क्या वे वोट दे पाएंगे, इन सवालों को लेकर असमंजस बना हुआ है। हालांकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए ट्रिब्यूनल का रास्ता खुला है, लेकिन इसे लेकर भी स्पष्टता नहीं है। एसआईआर की प्रक्रिया में अब भी कई लोगों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। इसी डर के बीच मगराहाट में एक व्यक्ति की मौत का मामला सामने आया है। मृतक का नाम महमूद गाजी है। वह मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का निवासी था। एसआईआर प्रक्रिया के तहत बूथ संख्या 158 की मतदाता सूची से उसका और उसके बेटे का नाम हटा दिया गया था। उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया भी गया था। आरोप है कि आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके नाम सप्लीमेंटरी सूची में शामिल नहीं किये गये। नाम वापस जुड़वाने के लिए उन्होंने विभिन्न दफ्तरों के चक्कर लगाए। परिवार का कहना है कि “जरूरी कागजात देने के बावजूद उनका नाम कैसे हटाया गया, इसका जवाब चुनाव आयोग को देना होगा।” परिवार को अंतिम सप्लीमेंट्री सूची का इंतजार था, लेकिन उसमें भी निराशा हाथ लगी। उस सूची में भी पिता-पुत्र का नाम नहीं था, जिससे वे काफी चिंतित हो गए थे। गुरुवार को अचानक उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ। उन्हें डायमंड हार्बर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार की सुबह उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार और पड़ोसी चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि “जरूरी दस्तावेज देने के बावजूद नाम क्यों हटाया गया, इसका जवाब आयोग को देना चाहिए।” इससे पहले भी राज्यभर में एसआईआर को लेकर डर के बीच ऐसी घटनाओं के आरोप सामने आ चुके हैं।