

कोलकाता : ईडी ने कसबा के कुख्यात प्रमोटर विश्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' के खिलाफ अदालत में आरोपों का एक लंबा पुलिंदा पेश किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी का दावा है कि सोना पप्पू डरा-धमकाकर दूसरों की कीमती जमीनें और संपत्तियां बेहद कम दामों में अपने नाम करवा लेता था। ईडी ने अदालत को बताया कि यह खेल अकेले पप्पू का नहीं है, बल्कि इसके पीछे तीन लोगों का एक बड़ा नेक्सस काम कर रहा है। जांच एजेंसी के मुताबिक, सोना पप्पू असल में बेहला के व्यवसायी जय कामदार और कोलकाता पुलिस के तत्कालीन डीसी शांतनु सिंह विश्वास के लिए काम करता था और इस जमीन सिंडिकेट की कमान संभालता था। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद अभियुक्त को 28 मई तक ईडी हिरासत में भेज दिया ।
9 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तारी, 10 दिनों की रिमांड की मांग
सोमवार को करीब 9 घंटे की मैराथन पूछताछ के बाद ईडी ने सोमवार रात सोना पप्पू को गिरफ्तार कर लिया था। मंगलवार को उसे विशेष अदालत में पेश किया गया। ईडी के वकील ने अदालत में पप्पू के सिंडिकेट मॉडल का खुलासा करते हुए कहा कि आरोपित के खिलाफ जबरन वसूली, धमकी, जमीन कब्जा करने और अवैध हथियार रखने जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। इन सभी मामलों में पप्पू मुख्य आरोपित है। ईडी ने आगे की जांच के लिए आरोपित की 10 दिनों की हिरासत मांगी है, जबकि आरोपित के वकील ने जमानत की अर्जी दाखिल की है।
7.7 करोड़ की जमीन महज 1 करोड़ में खरीदी!
अदालत में ईडी ने इस सिंडिकेट के काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। ईडी ने बताया कि साल 2024 में जिस जमीन का बाजार मूल्य 7.7 करोड़ रुपये था, उसे महज 1 करोड़ रुपये में लिखवा लिया गया। साल 2022 में 18 कट्ठा की एक जमीन, जिसकी कीमत 5.42 करोड़ रुपये थी, उसे सिर्फ 1.39 करोड़ रुपये में खरीदा गया।
बुजुर्गों को बनाते थे निशाना:
ईडी के मुताबिक, यह गिरोह मुख्य रूप से असहाय और बुजुर्ग मकान मालिकों को निशाना बनाता था। डराने-धमकाने के लिए बाहुबल (क्रिमिनल मसल) का इस्तेमाल किया जाता था ताकि वे कम दाम में जमीन बेचने पर मजबूर हो जाएं। जांच में पप्पू और उसके परिवार के नाम पर ऐसी 30 फर्जी या शेल कंपनियों का पता चला है, जिनके जरिए रियल एस्टेट कारोबार पर नियंत्रण रखा जाता था।
पुलिस अधिकारी और व्यवसायी से जुड़े तार, हथियार भी बरामद
ईडी ने दावा किया कि तलाशी अभियान के दौरान पप्पू के घर से एक रिवॉल्वर बरामद हुई है, जो जय कामदार की कंपनी के नाम पर खरीदी गई थी। इसी हथियार की खरीद के बाद रवींद्र सरोवर थाना क्षेत्र के कांकुलिया में भारी बवाल और तोड़फोड़ हुई थी, जिसमें स्थानीय लोगों ने पप्पू और उसके गुर्गों को मुख्य साजिशकर्ता बताया था। बैंक खातों की जांच से भी साफ हुआ है कि कामदार और पप्पू की कंपनियों के बीच करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। कामदार जो योजना बनाता था, पप्पू उसे जमीन पर अमली जामा पहनाता था। दूसरी ओर, सोना पप्पू के वकील ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, ‘व्यापार करना कोई अपराध नहीं है। ईडी जिन आरोपों की जांच कर रहा है, उससे मेरे मुवक्किल का कोई आर्थिक लाभ नहीं जुड़ा है। समाज में उनकी छवि खराब करने के लिए यह सब कहानियां गढ़ी जा रही हैं।’ उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर जमीनें कम दाम में खरीदी गईं, तो मूल मालिकों ने शिकायत क्यों नहीं की? साथ ही, बरामद हथियार को पूरी तरह वैध और नियम सम्मत बताया।