

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नेपाल के लांगटांग क्षेत्र में हालिया हिमनद आपदा के बाद हिमालय उन्नति मिशन ने हिमालयी क्षेत्र में बादल फटने, भूस्खलन, हिमनद टूटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं पर एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन की घोषणा की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में नेपाल और चीन में १,००० से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है और ४,४०० से अधिक लोग लापता हैं।
द आर्ट ऑफ लिविंग के नेतृत्व और इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन वैल्यूज़ के सहयोग से चल रहे इस मिशन में १३४ साझेदार संगठन शामिल हैं। भारत, नेपाल और भूटान में वैज्ञानिक, पर्यावरणविद, शोध संस्थान, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ और स्थानीय समुदाय मिलकर अध्ययन करेंगे।
अध्ययन के निष्कर्षों का उपयोग आपदा-प्रवण क्षेत्रों के मानचित्र तैयार करने, निगरानी मजबूत करने, पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने और स्थानीय स्तर पर आपदा तैयारी बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
मिशन ने केंद्र सरकार से ‘हिमालय प्राधिकरण’ बनाने की भी मांग की है, जो हिमालयी राज्यों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, जलवायु लचीलापन और आपदा जोखिम कम करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित कर सके।
हिमालय उन्नति मिशन के सलाहकार, पद्मश्री सम्मानित पर्वतीय पर्यावरणविद् और समन्वित पर्वतीय विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र के पूर्व उप-महानिदेशक डॉ. एकलव्य शर्मा ने कहा:
“भारतीय हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास के लिए बिखरे हुए प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए साझा दृष्टिकोण, एकीकृत योजना और त्वरित कार्यान्वयन आवश्यक है, जिसमें वैज्ञानिकों, योजनाकारों, नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों को एक साथ लाया जाए।”
पांच वर्षों का जमीनी अनुभव
२०२१ से मिशन ने हिमालयी क्षेत्र में २२,२२,५५४ पेड़ लगाए, ६१३ सौर सूक्ष्म विद्युत प्रणालियां स्थापित कीं और ३५६ सीमावर्ती विद्यालयों में सौर ऊर्जा से चलने वाली डिजिटल कक्षाएं शुरू कीं, जिससे १,९५,००० से अधिक लोगों को लाभ मिला।
‘संवेदना’ आपदा राहत अभियान के तहत १,००० से अधिक स्वयंसेवकों ने हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तर बंगाल और उत्तराखंड में बाढ़ एवं भूस्खलन से प्रभावित ७,२४८ परिवारों और ४५,००० से अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाई।
मिशन ने भारत और नेपाल में ५,४५० से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, ५,६०० से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण एवं प्रमाणन तथा ९,३८६ से अधिक विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने में सहयोग किया है।
द आर्ट ऑफ लिविंग का वैश्विक आपदा राहत अनुभव भी इस पहल का आधार है। २००४ की हिंद महासागर सुनामी में ३५,००० से अधिक लोग, जबकि २०१५ के नेपाल भूकंप में लगभग १,५०,००० लोग राहत सहायता से लाभान्वित हुए। नेपाल में ८,००० से अधिक स्वयंसेवकों ने १२ प्रमुख प्रभावित जिलों में काम किया और लगभग ३०,००० लोगों के लिए २२५ से अधिक मानसिक आघात राहत कार्यशालाएं आयोजित की गईं।
मिशन की स्थापना २०२१ में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की दृष्टि से प्रेरित होकर हुई। उनका कहना है:
“हिमालय विश्व के गौरव का स्रोत और १९० करोड़ से अधिक लोगों के जीवन का आधार है। इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए अधिक सुसंगत, समग्र और एकीकृत समाधान हेतु क्षेत्रीय सहयोग आवश्यक है।”
हिमालय उन्नति मिशन भारत, नेपाल और भूटान के १३ हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, आपदा राहत, सतत आजीविका और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
“हम साथ खड़े हैं। हम साथ मिलकर समाधान करेंगे।”