

कोलकाता : पश्चिम बंगाल का उच्च शिक्षा विभाग राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों में उपलब्ध सीटों की व्यापक समीक्षा करने जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य उन पाठ्यक्रमों और विषयों की पहचान करना है, जिनमें लगातार कम नामांकन हो रहा है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके और छात्रों की वर्तमान मांग तथा रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, विभाग ने केंद्रीयकृत प्रवेश पोर्टल (Centralised Admission Portal-CAP) से जुड़े कॉलेजों में विषयवार प्रवेश और सीटों की स्थिति का आकलन शुरू कर दिया है। समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि किन विषयों में वर्षों से सीटें खाली रह रही हैं और किन पाठ्यक्रमों की मांग लगातार घट रही है।
ऐसे मामलों में सीटों की संख्या घटाने, समान प्रकृति के पाठ्यक्रमों का विलय करने अथवा कम मांग वाले पाठ्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने पर विचार किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में बड़ी संख्या में स्नातक सीटें हर वर्ष खाली रह जाती हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि छात्र अब रोजगारोन्मुखी और नए दौर के विषयों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में पारंपरिक पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल आधारित और अन्य मांग वाले विषयों में अवसर बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
कॉलेजों के प्राचार्यों ने भी सरकार के समक्ष कम नामांकन से उत्पन्न वित्तीय चुनौतियों का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि सरकारी सहायता प्राप्त कई कॉलेजों के रखरखाव और बुनियादी ढांचे का बड़ा हिस्सा छात्र शुल्क पर निर्भर करता है।
लगातार घटते प्रवेश के कारण संस्थानों के सामने आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस समीक्षा का उद्देश्य केवल सीटें कम करना नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुखी बनाना है।
विभाग सभी विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद अंतिम नीति तैयार करेगा, ताकि संसाधनों का संतुलित उपयोग हो और छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बेहतर शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें।