

कोलकाता : कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को बंगाल पुलिस की एक महिला अधिकारी की मतदाता सूची में नाम हटने से जुड़ी SIR याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। पुलिसकर्मी ने शादी के बाद सरनेम बदलने के कारण मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का हवाला देते हुए मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी।
शादी के बाद बदला सरनेम, SIR में कट गया नाम
पुलिसकर्मी के वकील ने अदालत को बताया कि उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम 2002 और 2026 की SIR सूची में दर्ज हैं, लेकिन महिला पुलिसकर्मी का नाम सरनेम में अंतर के कारण SIR प्रक्रिया के बाद हटा दिया गया। उन्होंने जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि नाम हटने की वजह से वह अपना विभागीय काम पूरा नहीं कर पा रही हैं।
इस पर न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने तत्काल सुनवाई की जरूरत पर सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि क्या नाम हटने के कारण विभाग ने उनकी सेवा समाप्त करने का कोई आदेश जारी किया है और ऐसी स्थिति में इतनी जल्दबाजी क्यों है। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अधिकारी अपना काम कर रही हैं, इसलिए मामले को तत्काल सुनने का आधार स्पष्ट होना चाहिए।
SIR मामलों से भरी अदालत
हाईकोर्ट की इसी पीठ के सामने SIR से जुड़े बड़ी संख्या में मामले आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ कभी-कभी 70 से 80 मामलों की सुनवाई करती है। मामलों की गंभीरता को देखते हुए अपीलीय ट्रिब्यूनल को कभी दो सप्ताह तो कभी तीन महीने के भीतर मामले निपटाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
इसी दौरान एक इंडियन आर्मी में भर्ती की तैयारी कर रहे युवक और एक नर्सिंग अभ्यर्थी ने भी तत्काल सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने आर्मी अभ्यर्थी की अर्जेंट सुनवाई मंजूर कर ली, क्योंकि उसका नाम मतदाता सूची में नहीं होने के कारण डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा था और ओडिशा में भर्ती का दूसरा चरण 15 सितंबर को निर्धारित है।