अफसरों के तबादले को लेकर दायर पीआईएल खारिज

ईसीआई के पास है संविधान प्रदत्त अधिकार
अफसरों के तबादले को लेकर दायर पीआईएल खारिज
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य के आला अफसरों के तबादले को लेकर दायर पीआईएल को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस सुजय पाल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन के डिविजन बेंच ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया। डिविजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद फैसले को आरक्षित कर लिया था। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने 267 अफसरों के तबादले को लेकर दूसरी पीआईएल को भी खारिज कर दिया।

एडवोकेट अनामिका पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि यह पीआईएल बुनियादी रूप से ही गलत थी। स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए अफसरों के तबादले को लेकर ईसीआई में निहित अधिकार को चुनौती ही नहीं दी गई थी। इस पीटिशन में ही कहा गया है कि ईसीआई के पास अफसरों का तबादला करने का अधिकार तो है, पर इसका प्रयोग एहतियात और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। लिहाजा यह स्वीकार करने में कोई शक नहीं है कि पीटिशनर ने माना है कि ईसीआई के पास यह अधिकार है। इसलिए ईसीआई के न्यायिक अधिकार क्षेत्र को चुनौती नहीं दे सकते हैं। यह साबित नहीं कर पाए हैं ईसीआई ने अपने अधिकार का बेजा इस्तेमाल किया है जिससे जनहित प्रभावित हुआ है। डिविजन बेंच ने कहा है यह फैसला उन अफसरों की राह में रोड़ा नहीं बनेगा जो अपने तबादले को कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती देना चाहते हैं। पीटिशनर यह साबित नहीं कर पाएं हैं कि इन तबादलों के कारण प्रशासन ठप हो जाएगा। इस तरह के तबादले अन्य राज्यों में भी किए गए हैं जहां विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। बेंच ने कहा है कि इन अफसरों को कुछ दिनों के लिए हटाया गया है इसलिए ईसीआई की यह जवाबदेही नहीं बनती है कि किस वजह से इन अफसरों का तबादला किया गया है। इस मामले में पीटिशनर अर्क कुमार नाग एक एडवोकेट हैं और उन्हें इससे कोई शिकायत नहीं हो सकती है जबतक इससे जनहित प्रभावित नहीं हो।.इस मामले में पीटिशनर की तरफ से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी और ईसीआई की तरफ से सीनियर एडवोकेट डी एस नायडू ने पैरवी की।


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