किस आधार पर तय करते हैं कटऑफ मार्क्सकिस आधार पर तय करते हैं कटऑफ मार्क्स

पुलिस भर्ती के मामले में हाई कोर्ट का सवाल
किस आधार पर तय करते हैं कटऑफ मार्क्सकिस आधार पर तय करते हैं कटऑफ मार्क्स
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य में पुलिस भर्ती को लेकर हाई कोर्ट में एक रिट दायर की गई है। इसमें कटऑफ मार्क्स के आधार को लेकर सवाल उठाया गया है। जस्टिस अमृता सिन्हा ने सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार को एफिडेविट दाखिल करके जवाब देने का आदेश दिया है। इसके लिए 17 अप्रैल का समय तय कर दिया है। हालांकि राज्य सरकार और अतिरिक्त समय देने की अपील कर रही थी, पर जस्टिस सिन्हा ने इनकार कर दिया।

जस्टिस सिन्हा ने कहा कि नियुक्ति पत्र दिए जाने से पहले यह मामला हल हो जाना चाहिए। अगर देर करेंगे तो

तो अंतरीम आदेश देना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में इस नियुक्ति प्रक्रिया का भविष्य इस मामले में आने वाले फैसले पर निर्भर करेगा। सरकार के पास पूरा डाटा जब उपलब्ध है तो एफिडेविट दाखिल करने से परहेज क्यों है। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि कटऑफ मार्क्स तय करने का पूरा अधिकार नियोक्ता के पास होता है। जस्टिस सिन्हा ने कहा कि यही तो वो सवाल है जिसे चुनौती दी गई है। कटऑफ मार्क्स तय करने की प्रक्रिया क्या है। इसे चुनौती देते हुए कहा गया है कि कटऑफ मार्क्स कुछ इस तरह तय किया जाता है कि उम्मीदवार पीएमटी और पीटीएफ स्टेज तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। नियुक्ति के लिए जारी अधिसूचना में कटऑफ मार्क्स का ब्यौरा नहीं दिया गया था। नियुक्ति में 15 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है, पर प्रत्येक वर्ष के अनुभव के लिए कितने मार्क्स दिए जाएंगे यह स्पष्ट नहीं है। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, पर चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। जस्टिस सिन्हा ने कहा कि वे कटऑफ मार्क्स कम करने के पक्ष में नहीं हैं, पर इसे तय करने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए।




किस आधार पर तय करते हैं कटऑफ मार्क्स

पुलिस भर्ती के मामले में हाई कोर्ट का सवालएफिडेविट दाखिल करने का आदेश

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य में पुलिस भर्ती को लेकर हाई कोर्ट में एक रिट दायर की गई है। इसमें कटऑफ मार्क्स के आधार को लेकर सवाल उठाया गया है। जस्टिस अमृता सिन्हा ने सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार को एफिडेविट दाखिल करके जवाब देने का आदेश दिया है। इसके लिए 17 अप्रैल का समय तय कर दिया है। हालांकि राज्य सरकार और अतिरिक्त समय देने की अपील कर रही थी, पर जस्टिस सिन्हा ने इनकार कर दिया।

जस्टिस सिन्हा ने कहा कि नियुक्ति पत्र दिए जाने से पहले यह मामला हल हो जाना चाहिए। अगर देर करेंगे तो

तो अंतरीम आदेश देना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में इस नियुक्ति प्रक्रिया का भविष्य इस मामले में आने वाले फैसले पर निर्भर करेगा। सरकार के पास पूरा डाटा जब उपलब्ध है तो एफिडेविट दाखिल करने से परहेज क्यों है। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि कटऑफ मार्क्स तय करने का पूरा अधिकार नियोक्ता के पास होता है। जस्टिस सिन्हा ने कहा कि यही तो वो सवाल है जिसे चुनौती दी गई है। कटऑफ मार्क्स तय करने की प्रक्रिया क्या है। इसे चुनौती देते हुए कहा गया है कि कटऑफ मार्क्स कुछ इस तरह तय किया जाता है कि उम्मीदवार पीएमटी और पीटीएफ स्टेज तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। नियुक्ति के लिए जारी अधिसूचना में कटऑफ मार्क्स का ब्यौरा नहीं दिया गया था। नियुक्ति में 15 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है, पर प्रत्येक वर्ष के अनुभव के लिए कितने मार्क्स दिए जाएंगे यह स्पष्ट नहीं है। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, पर चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। जस्टिस सिन्हा ने कहा कि वे कटऑफ मार्क्स कम करने के पक्ष में नहीं हैं, पर इसे तय करने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए।

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