एक मामले में 36 साल पहले दाखिल की थी चार्जशीट

फिर भी सुनवाई नहीं हो पाई पूरी
एक मामले में 36 साल पहले दाखिल की थी चार्जशीट
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : हाई कोर्ट ने एक बार फिर एक मामले का तेजी से ट्रायल पूरा किए जाने का आदेश दिया है। इस बार जस्टिस जय सेनगुप्त ने यह आदेश दिया है। इस मामले में 36 साल पहले चार्जशीट दाखिल की गई थी। न्यायिक प्रक्रिया की मंथर गति के कारण पेटीशनर को सेवानिवृत्त होने के बाद भी पेंशन नहीं मिल पा रही है। जब तक आपराधिक मामले का निपटारा नहीं होता है तब तक पेशन नहीं मिल सकती है।

एडवोकेट घनश्याम पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अनिल चंद्र बर्मन ने यह पीटिशन दायर किया है। इस मामले का सबसे दिलचस्प पहलू तो यह है कि 2019 में हाई कोर्ट के एक बेंच ने इसे सेशन कोर्ट को सौंपने का आदेश दिया था। इसके बावजूद यह मामला किसी न किसी बहाने के नाम पर सेशन कोर्ट को नहीं सौंपा गया। दिनहाटा थाने में आईपीसी की धारा 302 सहित अन्य धाराओं के तहत 1987 में यह मामला दायर किया गया था। इसके बाद 1990 में चार्जशीट दाखिल की गई थी। इस मामले के कुछ अभियुक्त फरार हैं और अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। जस्टिस सेनगुप्त ने अपने आदेश में कहा है कि इसका खामियाजा यह पीटिशनर क्यों चुकाएगा। राज्य सरकार के एडवोकेट भी कहते हैं कि न्याय के हित में इसका ट्रायल तेजी से पूरा होना चाहिए। जस्टिस सेनगुप्त ने इसे बेहद दुर्भाग्यजनक करार दिया है। उन्होंने आदेश दिया है कि न्याय के हित में ट्रायल कोर्ट इस मामले की कार्यवाही छह सप्ताह के अंदर सेशन कोर्ट को सौंप दे। अगर आवश्यक हो तो इस पीटिशनर के खिलाफ मामले को अलग कर दिया जाए। इसके बाद सेशन कोर्ट इस मामले का ट्रायल यथाशीघ्र पूरा करे। बिलावजह का एडजर्नमेंट नहीं दिया जाए।


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