

जितेंद्र, सम्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : मां के निधन के बाद बेटी ने फैमिली पेंशन के लिए आवेदन किया था। उसके पिता एक राष्ट्रीयकृत बैंक में कर्मचारी थे। पेंशन देने के बजाय उसे एक नोटिस थमा दी गई। इसमें कहा गया था कि 17 लाख से अधिक का बकाया ब्याज के साथ 7 दिनों के अंदर चुका दे। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी। जस्टिस अमृता सिन्हा ने मामले की सुनवाई के बाद एक गाइडलाइन देते हुए बैंक को चार सप्ताह के अंदर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
यह एक अद्भुत मामला है। पेटीशनर मधु लीना सेन के पिता इस बैंक में कर्मचारी थे। निधन के बाद उन्हें पेंशन मिलने लगी। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी को पेंशन मिलने लगी। करीब 20 साल तक पेंशन लेने के बाद 2023 में उनका निधन हो गया। इसके बाद उनकी अनब्याही बेटी ने फैमिली पेंशन के लिए आवेदन किया। उसके आवेदन के बाद ही बैंक के अधिकारियों ने यह तथ्य ढूंढ निकाला कि उसकी मां को 20 साल तक प्राप्य पेंशन के अलावा अतिरिक्त रकम दी जा रही थी। इस मौके पर जस्टिस अमृता सिन्हा ने सवाल किया कि अगर यह बेटी नहीं होती तो आपने जो अतिरिक्त रकम दी है इसका पता ही नहीं चलता. इधर बेटी किडनी की मैरिज है, उसे डायलिसिस की जरूरत है, दवा खरीदने को पास में पैसे नहीं है। उसकी मां को उसके जीवन काल में कभी इस बाबत नोटिस नहीं दी गई थी। जस्टिस सिन्हा ने कहा कि बैंक अगर चाहे तो इस रकम को माफ करने का फैसला ले सकता है। दूसरी तरफ अगर वसूली अनिवार्य हो तो बहुत ही सामान्य किस्त में इसकी वसूली की जा सकती है। पर इसके साथ यह ध्यान रखना पड़ेगा कि पेटीशनर का इलाज किसी हालत में प्रभावित न हो। बैंक को इस बाबत चार सप्ताह के अंदर फैसला लेने का आदेश दिया है।