

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : करीब आठ साल से पत्नी से अलग रह रहे पति को हाई कोर्ट से तलाक की मंजूरी मिल गई। लोवर कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद पति ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्या और जस्टिस सुप्रतीम भट्टाचार्या के डिविजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद उपरोक्त आदेश दिया। डिविजन बेंच ने पत्नी के खिलाफ लगे उत्पीड़न के आरोप को सही करार दिया है।
एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सीआईएसएफ में कार्यरत पिंटु महता ने यह अपील दायर की थी। डिविजन बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि पत्नी की तरफ से लगाए गए आरोप आधारहीन हैं। इसके अलावा दोनों का वैवाहिक संबंध अब इस मुकाम पर पहुंच चुका है कि उसे सुधारा नहीं जा सकता है। लिहाजा पति को तलाक पाने का अधिकार बनता है। डिविजन बेंच ने अपने आदेश में पति के उस आरोप को सही ठहराया है जिसमें पत्नी के खिलाफ मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। इस मानसिक उत्पीड़न से सिर्फ पति ही नहीं पूरा परिवार जूझ रहा था। पति सीआईएसएफ में कार्यरत है और यह एक अनुशासित फोर्स है जो इस तरह के आरोप अगर सही हैं तो कत्तई बर्दास्त नहीं कर सकता है। पत्नी के इस आधारहीन आरोप के कारण पति और उसके परिवार की छवि समाज में धूमिल हुई है। यहां तक कि पति की नौकरी भी दांव पर लग गई है। इस वजह से पत्नी के खिलाफ हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13 के तहत मामला बनता है। डिविजन बेंच ने कहा है कि पति सिर्फ इसी आधार पर तलाक पाने का हकदार है। इस मामले में यह साबित नहीं हो पाया है कि इस लंबे आठ वर्षों के दौरान वे पति पत्नी की तरह रह रहें थे। डिविजन बेंच ने कहा है कि ट्रायल जज ने तलाक के आवेदन को खारिज करके गलती की है। लिहाजा पीटिशनर की याचिका मंजूर की जाती है।